पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव,ईरान के कई ठिकानों पर बरसाए बम; पश्चिम एशिया में माहौल क्या?

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की। अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।

अमेरिकी सेंट्रल कमान के मुताबिक,  यह अभियान करीब दो घंटे तक चला। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों में सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन से जुड़े ठिकानों के अलावा कुछ वायु रक्षा प्रणालियों पर भी हमला किया गया।
ट्रंप ने क्या-क्या कहा? 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले का जवाब देना जरूरी था। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और हितों पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा। उधर, ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित केशम द्वीप पर दो लोग घायल हुए हैं। वहीं दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम इलाकों में कई धमाकों की भी खबर है।
किन-किन देशों तक पहुंचा संघर्ष?
तनाव का असर अब दूसरे देशों में भी दिखने लगा है। मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर खड़े दो गैस जहाजों पर ड्रोन हमले की खबर है। हमले के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई। सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि ईरान समर्थित इराकी गुटों ने उसके तेल ठिकानों को निशाना बनाया। वहीं यमन के हूथी विद्रोहियों ने सऊदी ऊर्जा ठिकानों पर हमले की जिम्मेदारी ली है।
तेल बाजार पर क्या असर?
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 7.3 प्रतिशत बढ़कर 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

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शांति की कोशिशें कमजोर
अरब देशों की मध्यस्थता के बावजूद दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। फिलहाल किसी समझौते की संभावना नजर नहीं आ रही है। लगातार बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा और बढ़ा दिया है। इसके साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता गहरा गई है।

शांति वार्ता लगभग ठप
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए ओमान, कतर और कुछ अन्य खाड़ी देश लगातार मध्यस्थता की कोशिश कर रहे थे। हालांकि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमले और उसके बाद अमेरिका की बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई के बाद बातचीत की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ गई है। दोनों देशों की ओर से फिलहाल किसी औपचारिक वार्ता की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में निकट भविष्य में युद्धविराम या तनाव कम होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है

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