क्या भविष्य में शहरों के भीतर एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के लिए सड़कों के ट्रैफिक में घंटों फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी? भारत में इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) विमान के पहले प्रोटोटाइप के अनावरण के बाद यही संभावना चर्चा में है।
क्या होता है eVTOL एयरक्राफ्ट और यह कैसे काम करता है?
यह विमान आम हवाई जहाजों और हेलीकॉप्टरों का एक बेहद आधुनिक और अनोखा मेल है, जिसकी कार्यप्रणाली इस प्रकार है:
- वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग:
यह विमान एक हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर की तरफ (लंबवत) उड़ान भर सकता है और सीधे नीचे उतर सकता है।मतलब: इसके इस खास गुण के कारण इसे उड़ान भरने या उतरने के लिए किसी लंबे रनवे की जरूरत नहीं होती।
- पारंपरिक विमान जैसी उड़ान:
एक बार हवा में सीधे ऊपर पहुंच जाने के बाद, यह हवा में आगे बढ़ने के लिए एक सामान्य हवाई जहाज की तरह ‘फॉरवर्ड फ्लाइट’ मोड में आ जाता है।
हेलीकॉप्टर के मुकाबले eVTOL तकनीक कितनी अलग और सुरक्षित है?
आम तौर पर लोग इसे एक छोटा हेलीकॉप्टर समझने की भूल कर सकते हैं। लेकिन तकनीकी रूप से यह उससे कहीं ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल है:
- मल्टीपल इलेक्ट्रिक प्रोपेलर्स का उपयोग:
जहां पारंपरिक हेलीकॉप्टर ईंधन से चलने वाले एक या दो बड़े रोटर्स (पंखों) पर निर्भर होते हैं। वहीं eVTOL विमान बैटरी से चलने वाले कई छोटे-छोटे इलेक्ट्रिक प्रोपेलर्स का उपयोग करता है। इसे ‘डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोपल्शन सिस्टम’ कहा जाता है।मतलब: इस सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह उड़ान के दौरान शोर को बहुत कम करता है और ऊर्जा की दक्षता (एनर्जी एफिशिएंसी) को बढ़ाता है।
- अधिक सुरक्षा बैकअप:
कई प्रोपेलर्स होने के कारण इस विमान में सुरक्षा का बेहतरीन बैकअप मिलता है। यदि उड़ान के दौरान इसका कोई एक मोटर फेल भी हो जाए, तो भी यह विमान बाकी मोटरों के सहारे पूरी सुरक्षा के साथ अपनी उड़ान जारी रख सकता है। - वर्टिपोर्ट्स से संचालन:
रनवे की जरूरत न होने के कारण ये विमान बेहद छोटे और संकुचित लैंडिंग स्थलों से भी ऑपरेट किए जा सकते हैं, जिन्हें ‘वर्टिपोर्ट्स’ कहा जाता है। यही खूबी इन्हें हवाई अड्डा ट्रांसफर, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और शहरों के भीतर छोटी दूरी की यात्राओं के लिए सबसे सटीक बनाती है।
ईप्लेन कंपनी के इस नए प्रोटोटाइप की तकनीकी खासियतें क्या हैं?
कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोग्राम के नए पड़ाव की घोषणा की है, जो इसकी तकनीकी ताकत को दर्शाती है:
- फुल-स्केल रियलिटी (2.2 टन का वजन):
कंपनी का नया प्रोटोटाइप e200X PT-01 अब छोटे पैमानों से निकलकर 2.2 टन वजन वाले एक पूर्ण-स्तरीय विमान के रूप में हकीकत बन चुका है। - कार्बन-फाइबर एयरफ्रेम:
इस विमान के पूरे ढांचे को मजबूत और हल्के कार्बन-फाइबर से तैयार किया गया है। - हाई-वोल्टेज पावरट्रेन:
इसमें 800V का बेहद शक्तिशाली और उच्च क्षमता वाला इलेक्ट्रिक पावरट्रेन लगाया गया है। - एडवांस कंप्यूटिंग और एवियोनिक्स:
विमान के भीतर सुपर-फास्ट प्रोसेसिंग के लिए NVIDIA IGX Thor कंप्यूटिंग हार्डवेयर और उड़ान नियंत्रण के लिए HENSOLDT एवियोनिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। - 5 साल की कड़ी मेहनत का नतीजा:
यह प्रोटोटाइप कंपनी की 5 साल की लंबी इंजीनियरिंग और टेस्टिंग का नतीजा है। इस दौरान कंपनी ने छोटे पैमाने के डेमोंस्ट्रेटर्स (विमानों) को उड़ाकर परीक्षण किया था, जिसमें 2021 में ‘ATVA’ और 2023 में भारी वजन उठाने वाला ‘e50’ विमान शामिल था। इन परीक्षणों के तहत कंपनी पहले ही 10,000 किलोमीटर से अधिक की टेस्ट उड़ानें पूरी कर चुकी है।
भारत में इस हवाई टैक्सी की व्यावसायिक शुरुआत कब और कैसे होगी?
इस तकनीक को आम जनता और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंचाने के लिए कंपनी ने एक स्पष्ट समयसीमा तय की है:
- 2028 से व्यावसायिक शुरुआत:
द ईप्लेन कंपनी की योजना साल 2028 से अपने कमर्शियल ऑपरेशन्स (व्यावसायिक संचालन) की शुरुआत करने की है। - शुरुआती ध्यान एयर एम्बुलेंस पर:
कमर्शियल लॉन्चिंग के शुरुआती चरण में कंपनी का मुख्य ध्यान एयर एम्बुलेंस सेवाओं पर होगा, ताकि ट्रैफिक में फंसे बिना मरीजों की जान बचाई जा सके। - पैसेंजर ट्रांसपोर्ट में विस्तार:
एयर एम्बुलेंस सेवा को सफलता से स्थापित करने के बाद, कंपनी इसका विस्तार आम यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए करेगी। - ग्राउंड टेस्टिंग की शुरुआत:
वर्तमान में इस विमान को उड़ान परीक्षण पर भेजने से पहले, आईआईटी मद्रास में स्थित कंपनी के 60,000 वर्ग फुट के विशाल प्लांट में इसका व्यवस्थित जमीनी परीक्षण का काम शुरू कर दिया गया है।








