जापानी भिक्षुओं ने सनातन धर्म और निरंजनी अखाड़े से प्रेरित होकर शुक्रवार को पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद से दीक्षा ली। इस धार्मिक समारोह में चार युवा संतों को मंडलेश्वर की उपाधि प्रदान करने की संस्तुति की गई। जूना और निरंजनी अखाड़ाें से जुड़े जापानी भिक्षुओं ने भारतीय सनातन परंपराओं में विश्वास जताया। इसमें जापान से निरंजनी अखाड़े के पहले महामंडलेश्वर स्वामी बाला कुंभ पुरी के अलावा स्वामी दर्शन भारती ने नेतृत्व किया।
मंडलेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित किए गए चार युवा संतों को धार्मिक प्रचार और मार्गदर्शन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष अनुष्ठान के बीच देश-विदेश से आए अनेक संत-महात्मा इसमें शामिल हुए। जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर ने नवदीक्षित संतों को धर्म के मार्ग पर चलने का उपदेश दिया। इसमें क्रमश: जापानी नाम दाईसाकू नारीता (हिंदी नाम सेंथिल नाथन), केन्ता इशियामा (वल्लालर), हिरोकी ताकाहाशी (कृष्ण कुमार), योशिमा मोरिया (मंग्यारकराशी), मासाकी गोतो (मदुरई वीरन), ताकानोबू (स्वथरा राजन) शामिल रहे।








