भीषण गर्मी से भारत, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देश बेहाल,क्यों बने ऐसे हालात?

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यूरोप में गर्मी से हालत नाजुक हो गए हैं। दो महीने के अंदर इस महाद्वीप पर दूसरी बार भीषण लू (हीटवेव) का दौर आया है। आलम यह है कि यूरोप के तीन प्रमुख देश- फ्रांस, स्पेन और इटली इस गर्मी और लू से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। फ्रांस में तो गर्मी के चलते कम से कम एक हजार लोगों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं। आलम यह है कि कुछ मुर्दाघरों में लाशों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि इन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा यूरोपीय देशों के अस्पतालों में भी हीटस्ट्रोक और डिहाइड्रेशन की समस्या वाले मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।

फ्रांस में हाल ही में एक चौंकाने वाली घटना यह हुई थी कि गर्मी से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग समुद्र किनारे पानी में उतरे और इस दौरान 40 लोगों की डूबने से मौत हो गई। इसके अलावा स्पेन में पारा 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है, जो कि सामान्य तौर पर 20-30 डिग्री के दायरे में रहने वाले देश के लिए काफी ज्यादा है। कुछ ऐसा ही हाल ब्रिटेन का भी है। अब यूरोप में इस भीषण गर्मी के चलते बिजली की समस्या पैदा होने के कयास लगाए जा रहे हैं, जो कि महाद्वीप पर ब्लैकआउट (एक साथ कई देशों की बिजली जाना) की संभावना को बढ़ा रहा है। यूरोप में इस स्थिति को लेकर डर की स्थिति है।

यूरोप में गर्मी-लू का दौर कितना घातक?

यूरोप में चल रही गर्मी और लू का मौजूदा दौर बेहद घातक साबित हो रहा है और इसके कारण पूरे महाद्वीप में कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। अधिकारियों ने कई क्षेत्रों में इसे जान के लिए खतरा घोषित करते हुए रेड अलर्ट जारी किए हैं।

फ्रांस में डूबने से लोगों की मौतें: गर्मी से बचने और राहत पाने के लिए समुद्र तटों, नदियों और झीलों का रुख करने वाले कम से कम 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। फ्रांस के प्रधानमंत्री ने इस जनहानि को एक त्रासदी कहा है। जान गंवाने वालों में अधिकतर युवा शामिल हैं।

बंद कारों और हीटस्ट्रोक से मौतें: दक्षिण-पूर्वी फ्रांस के कार्पेंट्रास में भीषण गर्मी के दौरान कार के अंदर दो और चार साल के दो बच्चे मृत पाए गए। इसके अलावा, बोर्डो क्षेत्र में 80 से 95 वर्ष की आयु के तीन बुजुर्गों की गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मौत हो गई।

जर्मनी में जनहानि: जर्मनी में अत्यधिक गर्मी से जुड़ी घटनाओं में कम से कम सात लोगों की जान चली गई है। जर्मनी में भी गर्मी के दौरान तैराकी से जुड़ी दुर्घटनाओं में पांच लोगों की जान चली गई। मरने वालों में बवेरिया की झीलों में डूबे 20 और 22 साल के दो युवक और बाल्टिक सागर में 79 वर्षीय एक महिला शामिल हैं।

स्पेन के आंकड़े: स्पेन में इस लू से पहले, केवल मई महीने में ही गर्मी के कारण 101 मौतें दर्ज की गई थीं।

यूरोप में यह लू इतनी घातक क्यों साबित हो रही है?

यूरोप में यह स्थिति इसलिए और भी खतरनाक है क्योंकि वहां का बुनियादी ढांचा इस तरह की प्रचंड गर्मी के अनुकूल नहीं है। बाकी महाद्वीपों के मुकाबले आमतौर पर ठंडे रहने वाले यूरोप के ज्यादातर घरों में एयर कंडीशनिंग (एसी) की सुविधा तक नहीं है, बल्कि यहां सर्दियों के मौसम से बचाव के लिए व्यवस्थाएं ज्यादा बेहतर हैं। ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों में घर सर्दियों में गर्मी को अंदर रोकने के लिए डिजाइन किए गए थे, जिसके कारण गर्मियों के मौसम में अब ये घर लोगों के लिए हीट ट्रैप (गर्मी को अंदर ही रोकने वाले कैदखाने) बन गए हैं जहां अंदर का तापमान बाहर से भी ज्यादा हो जाता है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि शरीर के अंदर का तापमान अनियंत्रित होने से हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉस्टन का खतरा बढ़ जाता है जो कि जानलेवा हो सकता है। यह भीषण गर्मी विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और उन लोगों के लिए सबसे अधिक घातक है जिन्हें हृदय या सांस की बीमारियां हैं।

अलग-अलग देशों में इस वक्त स्थिति कितनी बुरी है? 

यूरोप में यह अभूतपूर्व लू (हीटवेव) और गर्मी पैदा करने वाली एक वैज्ञानिक स्थिति- ओमेगा ब्लॉक मौसम प्रणाली विभिन्न देशों में भारी तबाही मचा रही है। अलग-अलग देशों में स्थिति इस प्रकार बेहद गंभीर है।

1. फ्रांस
फ्रांस इस हीटवेव का मुख्य केंद्र बना हुआ है। फ्रांस में इस लू की वजह से लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। देश के आधे से अधिक हिस्सों (54 प्रमंडलों) में सबसे ऊंचे स्तर का रेड अलर्ट जारी हो चुका है। फ्रांस ने 1947 के बाद से अपनी अब तक की सबसे गर्म रात दर्ज की है, और कई इलाकों में दिन का तापमान 42 से 43 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है।

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जबरदस्त गर्मी की वजह से हाल ही में 40 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है, और बच्चों व बुजुर्गों समेत कई लोग हीटस्ट्रोक का शिकार हुए हैं। पूरे देश में सैकड़ों स्कूल या तो बंद कर दिए गए हैं या उनकी कक्षाओं को आधे दिन का कर दिया गया है। लू को देखते हुए अधिकारियों ने रेड अलर्ट वाले कई क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब के सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया है। ट्रेन की पटरियों के फैलने और तारों को नुकसान पहुंचने के डर से कई ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।

2. ब्रिटेन (यूके)
ब्रिटेन का बुनियादी ढांचा इस तरह की गर्मी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है, जिसके कारण वहां हालात बहुत बुरे हैं। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने इतिहास में बहुत कम देखा जाने वाला रेड अलर्ट जारी किया है। दक्षिणी इंग्लैंड और लंदन के कुछ हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जो ब्रिटेन के इतिहास में जून महीने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड तोड़ सकता है।

इसके अलावा ब्रिटेन में ट्रॉपिकल नाइट्स की चेतावनी जारी की गई है, जिसका मतलब है कि रात के समय भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जाएगा। बिना एसी वाले लंदन के भूमिगत रेलवे नेटवर्क में सफर करना लोगों के लिए दमघोंटू हो गया है।

3. स्पेन
स्पेन में पारा 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। अंदुजर इलाके में यह रिकॉर्ड 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है। बास्क कंट्री और अंडालूसिया जैसे क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है।

अधिकारियों को सबसे ज्यादा चिंता जंगलों में आग को लेकर है। जबरदस्त गर्मी को देखते हुए मैड्रिड में होने वाली वर्ल्ड कप मैच की सार्वजनिक स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई है। बेघर और असुरक्षित लोगों को बचाने के लिए स्पेन के शहरों में क्लाइमेट शेल्टर और कूल-डाउन स्पॉट खोले गए हैं।

इटली
इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रोम, मिलान, फ्लोरेंस और वेनिस सहित 15-16 प्रमुख शहरों में रेड अलर्ट जारी किया है। यहां भारी गर्मी और एसी चलाने की वजह से नई इलेक्ट्रिक बसों की बैटरी बहुत तेजी से खत्म हो रही है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है।

जर्मनी, बेल्जियम और अन्य देश
जर्मनी: तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। फ्रैंकफर्ट हवाईअड्डे पर एक उड़ान के दौरान विमान काफी देर तक टारमैक पर खड़ा रहा, जिसके कारण अंदर मौजूद यात्रियों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें चिकित्सा सहायता देनी पड़ी। इसके अलावा तैराकी के दौरान पांच लोगों की डूबने से मौत हो गई है। बर्लिन में भयंकर तूफान की वजह से टेनिस टूर्नामेंट रोकना पड़ा।

बेल्जियम: बेल्जियम में इसे अब तक का सबसे गर्म दौर माना जा रहा है। गर्मी से मशीनरी और पटरियों को नुकसान न पहुंचे, इसके लिए कुछ ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

अन्य देश: स्विट्जरलैंड, पुर्तगाल, क्रोएशिया और सर्बिया जैसे बाल्कन देशों में भी मौसम विभाग ने गंभीर अलर्ट जारी किए हैं। कुल मिलाकर, यह हीट डोम यूरोप के लिए एक बहुत बड़ा संकट बन चुका है और जनजीवन से लेकर परिवहन और बिजली आपूर्ति तक, हर चीज को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

गर्मी में बिजली की कमी का संकट कितना बड़ा?

यूरोप में चल रही भीषण गर्मी ने बिजली की मांग को बेतहाशा बढ़ा दिया है। आलम यह है कि कई देशों में पावर ग्रिड पर भारी दबाव है और ब्लैकआउट (बिजली गुल होने) का खतरा पैदा हो गया है। तापमान बढ़ने के साथ एयर कंडीशनिंग (एसी) और पंखों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण बिजली की मांग इस कदर बढ़ गई है कि यह ऊर्जा उत्पादन की क्षमता को पार कर रही है। जब भी मांग उपलब्ध क्षमता से अधिक होती है, तो सिस्टम की फ्रीक्वेंसी गिर जाती है और ब्लैकआउट की स्थिति बन जाती है, जिसमें सुधार कर पाना मुश्किल हो जाता है।

इटली: गर्मी से राहत पाने के लिए एयर कंडीशनिंग के अचानक और भारी उपयोग की वजह से मिलान और ट्यूरिन जैसे प्रमुख शहरों में ब्लैकआउट का सामना करना पड़ा है। अत्यधिक गर्मी के दौरान यहां बिजली की मांग में 14.22% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा घरों की बड़ी संख्या होने के कारण, इटली में बिजली कटौती का कुल घरेलू आर्थिक नुकसान, जैसे- खाना खराब होना, हीटिंग-कूलिंग का नुकसान, पूरे यूरोप में सबसे अधिक आंका गया है, जो लगभग 15.47 करोड़ यूरो के करीब पहुंचने का अनुमान है।

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ग्रीस: यूरो न्यूज ने एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि जबरदस्त गर्मी वाले मौसम के दौरान दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली की मांग ग्रीस में बढ़ती है, जो कि 38.62% अधिक है। इसका मतलब है कि गर्मी के महीनों में वहां प्रति व्यक्ति 143.08 किलोवॉट घंट अतिरिक्त बिजली की खपत होती है। ग्रीस में बिजली कटौती की औसत अवधि 1.63 घंटे प्रति वर्ष है। ऐसे में ग्रिड पर अधिक दबाव से ग्रीस की बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

फ्रांस: हालांकि, फ्रांस में एयर कंडीशनिंग का चलन बहुत ज्यादा नहीं है, फिर भी गर्मियों के दौरान बड़ी इमारतों को ठंडा रखने के लिए स्पेस कूलिंग (एसी और पंखे) का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी वजह से 2025 के शुरुआती गर्मियों के एक हीटवेव में शाम की बिजली की मांग ऑफ-सीजन के औसत से 25% अधिक दर्ज की गई थी। माना जा रहा है कि इस बार अगर स्थिति ऐसी होती है और लंबे समय तक कायम रहती है तो फ्रांस भी ब्लैकआउट का शिकार हो सकता है।

हंगरी और पोलैंड: यूरोप में बिजली कटौती की सबसे लंबी औसत अवधि हंगरी में (2.92 घंटे प्रति वर्ष) आंकी गई है। इटली के बाद बिजली कटौती से होने वाला दूसरा सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान पोलैंड को (15.21 करोड़ यूरो) में होता है।

अन्य देश: बिजली की मांग में बढ़ोतरी के मामले में मोन्टेनेग्रो में 22.49%, तुर्किये में 21.91%, क्रोएशिया में 17.76% और स्पेन में 8.86% का उछाल देखा गया है। स्लोवेनिया में भी औसतन 2.16 घंटे का पावर आउटेज दर्ज किया गया है। इसके अलावा ब्रिटेन के मौसम विभाग ने भी चेतावनी जारी की है कि इस अत्यधिक गर्मी का ऊर्जा और पानी की आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

इस भीषण गर्मी के यूरोप में तेजी से फैलने की वजह क्या है?

यूरोप में इस भीषण गर्मी के इतनी तेजी से और गंभीर रूप में फैलने के पीछे कई भौगोलिक, मौसमी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी वजहें हैं।

1. ‘ओमेगा ब्लॉक’ और ‘हीट डोम’
मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, यूरोप में इस प्रचंड गर्मी की वजह एक उच्च दबाव प्रणाली है, जिसे ओमेगा ब्लॉक कहा जाता है। मौसम के नक्शे पर इसे ग्रीक अक्षर ओमेगा (Ω) से दर्शाया जाता है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें वायुमंडल में उच्च दबाव की वजह से बीच में गर्मी कैद हो जाती है। इस दौरान कम दबाव वाली ठंडी हवा वायुमंडल के किनारों पर रहती है। इस प्रणाली ने यूरोप के ऊपर एक हीट डोम बना दिया है, जो एक प्रेशर कुकर के ढक्कन की तरह काम कर रहा है और भयंकर गर्मी को नीचे ही कैद कर रहा है। चूंकि यह स्थिति पूरे यूरोप में बनी है, ऐसे में मध्य यूरोप इस वक्त भीषण गर्मी से जूझ रहा है, जबकि अलग-अलग छोरों (किनारों) पर मौजूद देश इनके मुकाबले थोड़ी राहत में हैं।

2. सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म हवा
इस हीट डोम ने उत्तरी अफ्रीका और सहारा रेगिस्तान से आने वाली गर्म और शुष्क हवा को खींचकर यूरोप के ऊपर फंसा लिया है। सामान्य तौर पर जेट स्ट्रीम नाम की हवाएं मौसम प्रणालियों को लगातार पश्चिम से पूर्व की ओर ले जाती हैं, लेकिन इस ओमेगा ब्लॉक ने उस प्रवाह को रोक दिया है। इससे वायुमंडल में एक ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे यह गर्म प्रणाली बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है और लोगों को राहत देने के लिए कोई ठंडी हवा नहीं चल पा रही है।

3. बादलों का बनना भी हुआ मुश्किल
यह उच्च-दबाव प्रणाली बादलों के निर्माण को भी रोक रही है। बादलों के न होने से लगातार तेज धूप सीधे सतह पर पड़ती है, जिससे धरती और उसके आस-पास की हवा सामान्य से 10 डिग्री सेल्सियस तक अधिक गर्म हो रही है।

4. जलवायु परिवर्तन
कोयला, तेल और गैस जलाने से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों की वजह से होने वाली ग्लोबल वार्मिंग इस स्थिति का मूल कारण है। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि इसके कारण अब इस तरह की हीटवेव ज्यादा बार, ज्यादा लंबी और कहीं अधिक तीव्र हो गई हैं। खासकर यूरोप में हरित ऊर्जा के इस्तेमाल में धीमी प्रगति के बाद स्थिति और बिगड़ी है।

5. भौगोलिक स्थिति भी जिम्मेदार
यूरोप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप है। यह वैश्विक औसत से दो से तीन गुना ज्यादा तेजी से गर्म हो रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि यूरोप का कुछ हिस्सा आर्कटिक तक फैला है, जो दुनिया में सबसे तेजी से गर्म हो रहा है। वहां बर्फ पिघलने से नीचे की गहरे रंग की सतह सामने आ रही है, जो सूरज की गर्मी को और ज्यादा सोखती है। इसके अलावा, एक विडंबना यह भी है कि यूरोप के प्रदूषण विरोधी कानूनों ने हवा से उन छोटे कणों को साफ कर दिया है, जो पहले सूरज की गर्मी को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर देते थे, जिससे अब गर्मी और बढ़ गई है।

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अब यूरोपीय देश इन स्थितियों से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं?

स्कूलों और कार्यस्थलों के नियमों में बदलाव

  • पूरे यूरोप में सैकड़ों स्कूलों को या तो बंद कर दिया गया है या वहां आधे दिन की कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
  • बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए फ्रांस में कुछ कक्षाओं को सेमी-अंडरग्राउंड कमरों में शिफ्ट किया गया है।
  • बेल्जियम में छात्रों ने परीक्षा देने के लिए ठंडे चर्चों का सहारा लिया है, जबकि नीदरलैंड के स्कूल तय टाइमटेबल अपना रहे हैं।
  • इटली ने उन कर्मचारियों के लिए छुट्टी योजना फिर से लागू की है जो जबरदस्ती गर्मी में काम करते हैं, जैसे किसान और निर्माण मजदूर। ताकि वे काम रोककर या कम करके सरकारी फंड पा सकें।
  • स्पेन के 2024 के कानून के तहत दिन के सबसे गर्म समय में बाहर किए जाने वाले शारीरिक श्रम पर रोक लगा दी गई है, और फ्रांस-जर्मनी में निर्माण और खेती के काम का समय बदल कर सुबह जल्दी या रात में कर दिया गया है।

मुहैया कराई जा रहीं मुफ्त सार्वजनिक सुविधाएं

  • स्पेन के मैड्रिड और नीदरलैंड के एम्स्टर्डम जैसे शहरों ने क्लाइमेट शेल्टर और कूल-डाउन स्पॉट का एक नेटवर्क बनाया है, जैसे- लाइब्रेरी, कम्युनिटी सेंटर, और सुपरमार्केट, आदि जहां लोगों और उनके पालतू जानवरों को बैठने की जगह, पीने का पानी और ठंडक मिल सके।
  • पेरिस में गर्मी से बचने के लिए बुजुर्गों (65+) और युवाओं (25 से कम उम्र) को वातानुकूलित सिनेमाघरों के मुफ्त टिकट दिए जा रहे हैं। इसके अलावा ल्योन जैसे शहरों में म्यूनिसिपल म्यूजियम में प्रवेश मुफ्त कर दिया गया है।
  • स्पेन के कई शहरों (जैसे लोवरोनो, जारागोजा) में स्विमिंग पूल की फीस कम या बिल्कुल माफ कर दी गई है और लोगों को राहत देने के लिए रात 11 बजे तक पानी के फव्वारे और स्प्रिंकलर चलाए जा रहे हैं।
  • पेरिस में लोगों को गर्मी से राहत देने के लिए कैनाल सेंट-मार्टिन में तैरने की विशेष अनुमति दी गई है। इस नहर को ओलंपिक के दौरान पुनर्जीवित किया गया था और अब यह आम लोगों के लिए खोली गई है।

कई सार्वजनिक आयोजनों-सेवाओं पर भी रोक

  • यूरोप में लू और आग लगने के खतरे को देखते हुए कई जगह खेल-संगीत के आयोजन, आतिशबाजी और वर्ल्ड कप मैचों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग रद्द कर दी गई है।
  • पटरियों को फैलने और तारों को नुकसान से बचाने के लिए बेल्जियम और फ्रांस में बिना एसी वाली व पुरानी ट्रेन सेवाएं रद्द या कम कर दी गई हैं।

खाने-पीने और रहने को लेकर भी स्वास्थ्य सलाह

  • इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को मांस के बजाय हल्का खाना जैसे पास्ता खाने और बीयर व कॉफी की जगह पानी पीने की सलाह दी है। जर्मनी में एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी ने गर्मी से निपटने के लिए एक हॉटलाइन शुरू की है। वहीं, फ्रांस में रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पाबंदी लगा दी गई है, ताकि लोग डिहाइड्रेशन का शिकार न हों।
  • इसके अलावा फ्रांस में लोग अपने घरों को ठंडा रखने के लिए ब्लैंक डी मेउडॉन नाम के एक चाक पाउडर को पानी में मिलाकर अपनी खिड़कियों पर पेंट कर रहे हैं, जो सूरज की किरणों को रोककर घर के अंदर का तापमान प्रभावी ढंग से कम करता है।

यूरोप में मौसम को लेकर क्या स्थितियां आने का अनुमान है? 

प्रशांत महासागर में एक मजबूत अल नीनो आकार ले रहा है। मौजूदा लू पर इसका कोई खास असर नहीं है, लेकिन इसकी वजह से दुनिया भर में गर्मी तेजी से बढ़ेगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह अगले साल की गर्मियों की स्थिति को और भी अधिक भयंकर बना सकता है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यूरोप इस नए जलवायु संकट और जबरदस्त गर्मी के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है। वहां का पूरा बुनियादी ढांचा एक स्थिर और ठंडी जलवायु के हिसाब से बनाया गया था, जिसे अब यूरोप तेजी से अलविदा कह रहे हैं।


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