कैलाश मानसरोवर यात्रा: MEA ने जारी की एडवाइजरी, क्यों कहा- निजी टूर ऑपरेटरों पर भरोसा न करें तीर्थयात्री?

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पांच साल के लंबे इंतजार के बाद फिर से शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर विदेश मंत्रालय (MEA) ने तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। नेपाल में कई भारतीय श्रद्धालुओं के फंसने की घटनाओं के बाद मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चीन में प्रवेश के लिए आवश्यक वीजा और परमिट के बिना यात्रा शुरू करना गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। मंत्रालय ने श्रद्धालुओं से केवल अधिकृत टूर ऑपरेटरों के माध्यम से यात्रा करने और सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद ही घर से रवाना होने की अपील की है।

नेपाल में फंसे श्रद्धालुओं ने मांगी मदद
विदेश मंत्रालय ने बताया कि उसे नेपाल में फंसे कई भारतीय नागरिकों से सहायता के अनुरोध मिले हैं। ये श्रद्धालु निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे, लेकिन उनके पास चीन में प्रवेश के लिए आवश्यक वीजा और परमिट उपलब्ध नहीं थे। दस्तावेजों की कमी के कारण उन्हें आगे की यात्रा जारी रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
बिना पूरे दस्तावेज यात्रा शुरू न करें
मंत्रालय ने साफ कहा है कि श्रद्धालु भारत से अपनी यात्रा तभी शुरू करें, जब पूरी यात्रा के लिए जरूरी सभी दस्तावेज उनके पास उपलब्ध हों। केवल इस उम्मीद में यात्रा शुरू करना कि वीजा या परमिट बाद में मिल जाएगा, यात्रियों के फंसने का कारण बन सकता है। इसलिए सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही यात्रा आरंभ करें।

अधिकृत टूर ऑपरेटर का ही करें चयन
विदेश मंत्रालय ने यात्रियों को सलाह दी है कि यात्रा बुक कराने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि उनका टूर ऑपरेटर विधिवत पंजीकृत और अधिकृत है। अधिकृत ऑपरेटर के माध्यम से यात्रा करने से दस्तावेजी प्रक्रिया सही ढंग से पूरी होती है और यात्रा के दौरान किसी भी तरह की परेशानी या अनावश्यक जोखिम से बचा जा सकता है।

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पांच साल बाद फिर शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा
कोविड-19 महामारी और भारत-चीन सीमा पर बढ़े तनाव के कारण वर्ष 2020 से बंद पड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा पांच साल बाद वर्ष 2025 में दोबारा शुरू हुई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वर्ष यात्रा 15 जून से शुरू होकर 25 अगस्त 2025 तक चलेगी। यात्रा का संचालन दो पारंपरिक मार्गों से किया जा रहा है। पहला मार्ग उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से और दूसरा सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होकर गुजरता है। यात्रा की बहाली को भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

5,561 आवेदनों में से 750 यात्रियों का चयन
इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए कुल 5,561 लोगों ने आवेदन किया था। विदेश मंत्रालय ने कंप्यूटरीकृत लॉटरी प्रणाली के माध्यम से 750 तीर्थयात्रियों का चयन किया। यात्रा के लिए कुल 15 जत्थे बनाए गए हैं। इनमें पांच जत्थे, प्रत्येक में 50 यात्री, उत्तराखंड के लिपुलेख मार्ग से जाएंगे, जबकि 10 जत्थे, प्रत्येक में 50 यात्री, सिक्किम के नाथू ला मार्ग से यात्रा करेंगे। दोनों मार्गों पर पहले की तुलना में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और पैदल चलने की दूरी भी काफी कम हो गई है।

धार्मिक आस्था के साथ कूटनीतिक महत्व भी
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण यात्रा स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद गलवान घाटी संघर्ष के चलते भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के कारण भी यात्रा दोबारा शुरू नहीं हो सकी। इस वर्ष यात्रा की बहाली को केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारत और चीन के बीच विश्वास बहाली तथा सांस्कृतिक संपर्क मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही यात्रा करें और चीन में प्रवेश के लिए आवश्यक सभी वीजा एवं परमिट प्राप्त करने के बाद ही अपनी यात्रा शुरू करें।

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