राममंदिर में चढ़ावा चोरी: SIT की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे, बड़े पैमाने पर चोरी के संकेत, FIR की सिफारिश

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राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट एसआईटी अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी से लेकर कमीशनखोरी के खेल उजागर होने की बात कही गई है। मंदिर में कर्मचारियों की नियुक्ति, गणना प्रक्रिया में भी बड़े हेरफेर की आशंका एसआईटी ने जताई है। इनसे संबंधित एक-एक साक्ष्य एसआईटी ने जुटाए हैं। गवाहों का भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से लेकर उनके रिश्तेदारों, करीबियों और कर्मचारियों की भूमिका पर रिपोर्ट में सवाल खड़े किए गए हैं।

एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ आईजी रेंज किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन मंगलवार सुबह करीब 11 बजे शासन पहुंचे। तीनों अधिकारियों ने गोपनीय जांच रिपोर्ट संजय प्रसाद को दी। गृह विभाग इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेगा। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर सबसे बड़े सवाल उठाए गए हैं। कुछ की भूमिका भी उजागर की गई है। अंदेशा जताया गया है कि वे हेरफेर में शामिल रहे हैं। वहीं, कुछ पदाधिकारियों को लापरवाही का दोषी पाया गया है, जिनकी निगरानी में चढ़ावा चोरी हुआ। फिलहाल मामले में सबसे अधिक जो पदाधिकारी सवालों के घेरे में हैं, उनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा व निर्माण सहायक गोपाल राव का नाम शामिल है। 

सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान अहम

सूत्रों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ के साक्ष्य एसआईटी ने जांच रिपोर्ट में शामिल किए हैं। वहीं, कुछ अहम फुटेज एसआईटी को मिले भी हैं, जिससे चोरी के आरोपों पर मुहर लगी है। इसमें गणनाकर्मी सीधे तौर पर शामिल रहे। खासकर अनुकल्प, मनीष, अवनीश आदि हैं। इसके अलावा टिन्नू के खिलाफ भी साक्ष्य मिले हैं। चोरी में 25-30 लोगों की भूमिका पाई गई है। इन सभी पर एफआईआर की संस्तुति की गई है। इन सभी के खिलाफ कई गवाह भी हैं, जिनके बयान बेहद अहम हैं।

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कमीशन का आरोप बनेगा गले की फांस

ट्रस्ट के पदाधिकारियों के रिश्तेदार व करीबियों का भी जांच रिपोर्ट में जिक्र है। खासकर चंपत राय के करीबी टिन्नू यादव, अनिल मिश्रा के रिश्तेदार, गोपाल राव के रिश्तेदार सोम आदि का। अब इन सभी पर जल्द केस दर्ज हो सकता है। वहीं, अनिल मिश्रा पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों का भी जिक्र एसआईटी ने किया है। इंजीनियर ने अपने बयान में भी स्पष्ट रूप से कमीशन का आरोप लगाया है। चंपत राय और गोपाल राव पर भी लगे आरोपों को एसआईटी ने जांच में शामिल किया है। निर्माण के दौरान पत्थरों की खरीदारी में गोपाल की प्रमुख भूमिका थी।

गणना प्रक्रिया में बैंक की भूमिका अहम रहती थी। लिहाजा, एसआईटी ने बैंक अधिकारियों व उनके कर्मचारियों को भी दोषी पाया है। कुछ की मिलीभगत भी पाई गई है। यही नहीं, संविदाकर्मियों के हवाले गणना व्यवस्था को छोड़ देना और उसमें भी ट्रस्ट की सिफारिशों पर भर्ती करना सबसे बड़ी खामी के रूप में उजागर हुआ है। दूसरी तरफ सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर रकम मंदिर परिसर से जाती रही और पुलिसकर्मियों को भी भनक नहीं लगी। इसका जिक्र एसआईटी में किया गया है। जिससे पुलिसकर्मी भी सवालों के घेरे में आए हैं। उनकी भी जिम्मेदारी तय की गई है।

अंदेशा… शायद कुछ ऐसा हो

सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। क्योंकि गणना प्रक्रिया में इनकी भूमिका रहती थी। निगरानी में नाकामी चोरी की बड़ी वजह रही। इसलिए शायद इन सभी को लापरवाही का दोषी बनाया जाए। हालांकि, अनिल व गोपाल पर कानूनी शिकंजा भी कस सकता है।

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प्रमुख सिफारिशें… जारी रहेगी जांच

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एसआईटी ने ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश की है। नए तरीके से कर्मियों की भर्ती कराने की संस्तुति की है। चूंकि मामले में चोरी व कमीशनखोरी के साक्ष्य मिले हैं, इसलिए एफआईआर की सिफारिश कर विस्तृत जांच की बात कही है। एसआईटी को और समय मिल गया है। करीब दो सप्ताह बाद जांच कर विस्तृत रिपोर्ट एसआईटी सौंपेगी।


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