लखीमपुर खीरी में निकली अनोखी बरात, दूल्हे के फैसले से दुल्हन खुश, लोग भी कर रहे तारीफ

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शादियों में घोड़ी, बग्घी, लग्जरी कारों और चमक-दमक का दौर आम बात है, लेकिन लखीमपुर खीरी के एक युवक ने अपनी शादी को केवल एक पारिवारिक समारोह नहीं रहने दिया, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचन का संदेश देने का माध्यम बना दिया। उसकी अनोखी बरात पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।

बिजुआ ब्लॉक के ग्राम इटकुटी के मजरा सरदार टांडा निवासी किसान बहादुर सिंह के पुत्र राजेश सिंह शुक्रवार को अपनी दुल्हन ममता को लेने रंग-बिरंगे फूलों से सजे 20 ई-रिक्शों से बरात लेकर निकले। करीब 150 बराती इस अनोखी बारात में शामिल हुए। लगभग 10 किलोमीटर का सफर तय करती यह बरात जहां-जहां से गुजरी, वहां लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीण घरों से बाहर निकल आए और कई लोगों ने इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया।

बरात में ई-रिक्शों की लंबी कतार 
सबसे आगे दूल्हा राजेश सिंह ई-रिक्शा पर सवार थे, जबकि उनके पीछे बरातियों से भरे ई-रिक्शों की लंबी कतार चल रही थी। बिना धुएं और बिना धूम धड़ाके वाली इस बरात ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कई लोगों ने इसे बदलते दौर की नई और प्रेरणादायक सोच बताया।

 

राजेश सिंह बंगलूरू में एक अस्पताल में मेल नर्स के पद पर कार्यरत हैं। साधारण किसान परिवार से आने वाले राजेश का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े होने के कारण वह प्रदूषण के दुष्प्रभावों को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बातों से प्रेरित होकर उन्होंने अपनी शादी में ई-रिक्शों का इस्तेमाल करने का फैसला किया।

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यादगार बन गई बरात 
राजेश कहते हैं, ‘प्रदूषण का असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ता है। मैंने सोचा कि शादी जैसे खास अवसर पर अगर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाए तो यह समाज के लिए भी उपयोगी होगा। ई-रिक्शों से खर्च कम हुआ और बरात भी यादगार बन गई।

राजेश के पिता बहादुर सिंह अपने बेटे की सोच पर गर्व महसूस करते हैं। उनका कहना है कि बढ़ते प्रदूषण के दौर में ऐसे प्रयास समय की जरूरत हैं। उन्होंने कहा कि बेटे के सुझाव पर पूरे परिवार ने सहमति जताई और आज उन्हें खुशी है कि शादी के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश देने का अवसर मिला।

दुल्हन पक्ष भी खुश 
दुल्हन पक्ष ने भी इस पहल की सराहना की। दुल्हन ममता के पिता ओमप्रकाश ने कहा कि यह केवल एक शादी नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाला संदेश है। वहीं दुल्हन ममता ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनकी शादी पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के संदेश के साथ संपन्न हुई।

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