कॉकरोच जनता पार्टी: पार्टी बनाने की क्या होती है प्रक्रिया? कॉकरोच पार्टी की ये बातें नहीं जानते होंगे आप

 

भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां किसी भी नागरिक को अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का पूरा अधिकार है। हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसा अनोखा नाम भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई वास्तविक दल नहीं बल्कि एक मीम से जुड़ा सटायरिकल पॉलिटिकल मूवमेंट (व्यंग्यात्मक आंदोलन) है, जिसका कोई आधिकारिक रजिस्ट्रेशन नहीं है।

 

इसके बावजूद ये डिजिटल कैंपेन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र पिछले छह दिनों में इसके इंस्टाग्राम चैनल पर 1 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जो बीजेपी के आधिकारिक इंस्टाग्राम फॉलोअर्स (लगभग 80 लाख) से भी ज्यादा हैं। बता दें कि लोग अक्सर मजाक या किसी सामाजिक संदेश को अनोखे अंदाज में उठाने के लिए ऐसे विचित्र नाम चुनते हैं, लेकिन भारत में एक वास्तविक राजनीतिक दल बनाने के लिए चुनाव आयोग के कड़े नियमों और कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।

 

पार्टी रजिस्ट्रेशन की शुरुआती प्रक्रिया

  • आधिकारिक तौर पर नई पार्टी बनाने के लिए गठन के 30 दिनों के भीतर भारत निर्वाचन आयोग के पास आवेदन करना जरूरी होता है।
  • रजिस्ट्रेशन के लिए चुनाव आयोग के पास ₹10,000 का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना पड़ता है।
  • पार्टी के पास कम से कम 100 पंजीकृत सदस्य होने चाहिए, और उन सभी के पास वैध मतदाता पहचान पत्र होना जरूरी है।

नाम और संविधान से जुड़े कड़े नियम

  • नाम तय होने के बाद दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देकर जनता से आपत्तियां मांगी जाती हैं।
  • दल को अपना एक लिखित संविधान बनाना होता है, जिसमें देश के लोकतंत्र, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के प्रति निष्ठा का संकल्प शामिल हो।
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पार्टी को मान्यता और चुनाव चिह्न कैसे मिलता है?

  • पंजीकरण के तुरंत बाद पार्टी को ‘पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त’ दल का दर्जा मिलता है।
  • चुनावों में कुल मतदान का एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 6% वोट) या सीटें जीतने पर ही पार्टी को स्थायी मान्यता मिलती है।
  • नए दलों को चुनाव आयोग की ‘मुक्त प्रतीकों’ की सूची में से कोई एक अस्थायी चुनाव चिह्न चुनना होता है।

 

राजनीतिक दल के लिए अन्य जरूरी बातें

  • रजिस्ट्रेशन के बाद पार्टी के नाम पर अलग पैन कार्ड और बैंक खाता खुलवाना अनिवार्य होता है।
  • अगर कोई पार्टी लगातार पांच वर्षों तक कोई चुनाव नहीं लड़ती है, तो चुनाव आयोग उसका पंजीकरण रद्द या निष्क्रिय कर सकता है।
  • पार्टी को मिलने वाले हर एक रुपये के चंदे और खर्च का पूरा ऑडिट रिकॉर्ड रखना और उसे चुनाव आयोग को सौंपना होता है।
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