प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंट में लगातार दूसरी बार देशवासियों से तेल की बचत करने की अपील की है। उन्होंने वडोदरा में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट पिछले कई वर्षों के सबसे गंभीर संकटों में से एक है। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे भारत ने कोविड-19 महामारी से सफलतापूर्वक उबरकर आगे बढ़ा, वैसे ही इस संकट से भी देश बाहर निकलेगा। पीएम मोदी ने कहा कि भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक बड़ा हिस्सा बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है, ताकि देश की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सके। उन्होंने संबोधन से पहले ‘सरदारधाम-3’ शैक्षणिक संकुल का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का दिन किसी पवित्र त्योहार से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में शामिल होने से पहले वे सोमनाथ मंदिर भी गए थे, जहां उन्हें सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित अमृत महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिला। पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का सपना सरदार पटेल के संकल्प से ही पूरा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक धरोहर भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक है।
ईंधन बचत पर पीएम की अपील- सार्वजनिक परिवहन अपनाएं, सोना खरीद टालें
उन्होंने यह भी कहा कि जब भी देश पर युद्ध या कोई बड़ी आपदा आई है, तब नागरिकों ने सरकार के आह्वान पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है और अब भी इसी एकजुटता की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयास किए जाएं और ऐसे व्यक्तिगत खर्चों से बचा जाए जिनमें विदेशी मुद्रा का उपयोग होता है। पीएम ने एक बार फिर से लोगों से अपील की कि ईंधन की खपत कम करें और निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाएं या इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि लोग फिलहाल सोना खरीदने जैसी गैर-जरूरी खर्च वाली चीजों को टालें, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिल सके। उन्होंने स्कूलों में अस्थायी रूप से ऑनलाइन कक्षाएं चलाने की सलाह भी दी, ताकि मौजूदा परिस्थितियों में शिक्षा व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
‘छोटे-छोटे कदमों से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएं’
पीएम मोदी ने कहा कि पहले भी जब देश युद्ध या किसी बड़े संकट से गुजरा है, तब हर नागरिक ने सरकार के आह्वान पर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। आज भी सभी लोगों को मिलकर देश के संसाधनों पर बोझ कम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारत कई वस्तुओं के आयात पर लाखों करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा खर्च करता है, जबकि आयातित वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित है।
पीएम मोदी ने कहा कि जैसे एक-एक बूंद मिलकर घड़ा भरता है, वैसे ही छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। इसलिए हमें विदेशी उत्पादों पर निर्भरता कम करनी चाहिए और रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे खर्चों से बचना चाहिए जिनमें विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे ताकि बाहरी चुनौतियों के बावजूद देश की प्रगति पर कोई असर न पड़े।
‘छुट्टियां भारत में बिताएं’
पीएम ने कहा कि छुट्टियां शुरू होते ही कई परिवार बच्चों को लेकर विदेश घूमने निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल डेस्टिनेशन वेडिंग और विदेश यात्रा का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। पीएम मोदी ने कहा कि अब कई लोग विदेश में शादी करने की पुरानी आदत छोड़ रहे हैं, जो एक सकारात्मक बदलाव है। उन्होंने लोगों से सवाल करते हुए कहा कि क्या भारत में घूमने के लिए सुंदर और ऐतिहासिक जगहों की कमी है? उन्होंने कहा कि देश के भीतर ही ऐसी कई जगहें हैं जहां बच्चे भारत के इतिहास, संस्कृति और विरासत को करीब से जान सकते हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपनी छुट्टियां भारत में बिताएं, स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा दें और देश की संस्कृति पर गर्व महसूस करें।
युवाओं के कौशल-स्टार्टअप पर पीएम मोदी का जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि युवाओं को डिग्री पूरी करने के बाद केवल अनुभव की कमी के कारण भटकने नहीं देना चाहिए। इसके लिए उन्हें अप्रेंटिसशिप (प्रशिक्षण) के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश के पास एक बड़ा और कुशल कार्यबल तैयार होगा, जिसका सबसे ज्यादा लाभ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मिलेगा।
पीएम मोदी ने गुजरात के युवाओं की उद्यमशीलता की सराहना करते हुए कहा कि आज ‘स्टार्टअप इंडिया’ मिशन उनके सपनों को हकीकत में बदल रहा है। छोटे शहरों के युवा भी अब उद्यमी बन रहे हैं और वहीं से बड़े-बड़े स्टार्टअप सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। जो क्षेत्र पहले जोखिम भरे माने जाते थे, वे अब युवाओं की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।







