बड़ा हादसा: निर्माणाधीन मकान का छज्जा ढहा, 3 मजदूरों की माैत, परिजन ने किया हंगामा

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गरा के थाना एत्माद्दौला क्षेत्र के ट्रांस यमुना फेज-वन सी ब्लॉक में शनिवार को निर्माणाधीन मकान का छज्जा गर्डर सहित ढहने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। एक की मौके पर जबकि दो की इलाज के दौरान सांसें थमीं। सूचना पर पहुंचे मजदूरों के परिजन ने हंगामा कर दिया। पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। मकान स्वामी को हिरासत में ले लिया गया है।

ट्रांसयमुना कॉलोनी, फेज-1 सी ब्लॉक निवासी रवि प्रताप एक फैक्टरी में काम करते हैं। उन्होंने चार महीने पहले गिरीश राघव से यह मकान खरीदा था। पिछले दो महीने से मकान में निर्माण कार्य चल रहा था। पूर्व में एक मिस्त्री की हादसे में मौत के बाद काम रोक दिया गया था। रवि की पत्नी साधना सिंह ने बताया कि मिस्त्री मुन्नालाल को 175 रुपये प्रति फीट के हिसाब से निर्माण का ठेका दिया गया था। एक सप्ताह पहले ही उसने काम शुरू करवाया था।

शनिवार शाम करीब चार बजे मिस्त्री मुन्नालाल, एत्मादपुर के धौर्रा निवासी रंजीत और प्रकाश नगर निवासी जगदीश दूसरी मंजिल पर बनी दीवार के सहारे गर्डर लगाकर छज्जा बनाने के लिए पटाव कर रहे थे। नीचे खड़े होकर अजीत और मुकेश निर्देश दे रहे थे। काम के दौरान मुन्नालाल, रंजीत और जगदीश नवनिर्मित छज्जे की ओर चले गए। अधिक वजन के कारण छज्जा एक तरफ झुका और गर्डर सहित ढह गया।

हादसे में रंजीत (35) की मौके पर ही मौत हो गई। लोगों ने पुलिस की मदद से घायल मुन्नालाल (55) और जगदीश (55) को निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से एसएन इमरजेंसी ले जाया गया। उपचार के दौरान पहले मुन्नालाल फिर जगदीश की मौत हो गई। घटनास्थल पर पहुंचे मृतकों के परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। जल्दी काम का दबाव बनाने और सुरक्षा उपकरण का इंतजाम नहीं करने का आरोप लगाने लगे।

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मौके पर मौजूद एसीपी छत्ता शेषमणि उपाध्याय और एसीएम द्वितीय विनोद कुमार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया और लोगों को शांत कराया। मृतक रंजीत के भाई अजीत ने मकान मालिक रवि प्रताप के खिलाफ तहरीर दी है।

डेढ़ माह पहले हुई थी मिस्त्री की मौत
मकान स्वामी के पड़ोसियों ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले टूंडला निवासी मिस्त्री राकेश की भी निर्माण कार्य के दौरान छत से गिरकर मौत हो गई थी। उस समय भी मृतक के परिजन ने हंगामा किया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। दूसरे मिस्त्री को ठेका देकर दोबारा काम शुरू करवा दिया गया।

कैसे होगा मासूमों का पालन
हादसे में मरने वाले रंजीत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनकी पत्नी रेणु की बीमारी के कारण दो वर्ष पहले ही मौत हो चुकी है। बड़ा बेटा विवेक (11) और छोटे बेटे ऋषि (8) के पालन-पोषण के लिए कोई नहीं बचा है। पिता का शव देखकर दोनों रो रहे थे। मृतक मिस्त्री मुन्नालाल के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। उनके एक बेटे की दो वर्ष पहले मौत हो चुकी है। एक बेटे और बेटी की शादी हो चुकी है। सबसे छोटी बेटी मानसिक रूप से बीमार है।


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