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प्रदेश में अवैध निर्माण पर सख्ती होगी। आवास विभाग ने अपने अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के नक्शा पास करने का अधिकार खत्म कर दिया है। अब रेरा पोर्टल के माध्यम से नक्शा पास कराने की प्रक्रिया लागू की जाएगी।
सचिव आवास डॉ.आर राजेश कुमार की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को सचिवालय में हुई बैठक में तय किया गया कि अब पंचायती राज संस्थाओं को अधिसूचित क्षेत्रों में नक्शा पास करने का अधिकार नहीं रहेगा। 2025 के संशोधित अधिनियम की धारा-59 के तहत पंचायती राज अधिनियम की धारा-106 को निरस्त कर दिया गया है। इसके चलते अब केवल विकास प्राधिकरण ही अधिसूचित क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी करेंगे। आवास विभाग ने पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया कि वे तत्काल प्रभाव से एक सर्कुलर जारी करें, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
बैठक में ये भी तय किया गया कि राज्य के नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं के मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (रेरा) की निर्माणाधीन वेबसाइट से जोड़ा जाएगा। इसके तहत मानचित्र स्वीकृति प्राधिकारियों को पोर्टल में शामिल किया जाएगा, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध हो सके। एक अगस्त 2025 के शासनादेश के तहत भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में बढ़ोतरी के मुद्दे पर चर्चा हुई। आवासीय या पर्यटन उपयोग में परिवर्तन पर सर्किल रेट के बराबर शुल्क और व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन पर 1.5 गुना शुल्क लिया जा रहा है। आवास सचिव ने निर्देश दिए कि वे बोर्ड की बैठकों में विचार कर एक सप्ताह के भीतर संशोधित प्रस्ताव शासन भेजें। ताकि जनहित में राहत देने पर निर्णय लिया जा सके।