लोकसभा में 543 की जगह होंगे 850 सांसद- राज्यों को 815 और UTs को मिलेंगी 35 सीटें, केंद्र ने तैयार किया मसौदा

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भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है। संसद में गुरुवार को एक ऐसा विधेयक पेश किया जाएगा, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को प्रभावी बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की मौजूदा सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने की योजना है। इसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें निर्धारित करने का प्रावधान शामिल है।

 

संविधान में संशोधन का प्रस्ताव
यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रावधान करता है। इसके तहत लोकसभा का नया स्वरूप इस प्रकार होगा-

 

  • राज्यों से अधिकतम 815 सदस्य प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से चुने जाएंगे।
  • केंद्र शासित प्रदेशों से अधिकतम 35 सदस्य संसद द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार चुने जाएंगे।

 

जनसंख्या के आधार पर परिसीमन
सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या का अर्थ उस जनगणना के आंकड़ों से होगा, जिनकी आधिकारिक रूप से घोषणा की जा चुकी है।

महिला आरक्षण को लागू करने की तैयारी
सरकार का उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को प्रभावी बनाना है। इसके लिए लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 239AA, 330A, 332A और 334A के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (1/3) सीटों का आरक्षण देने का भी प्रावधान किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं को भी शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना और नीति निर्माण में उनकी भूमिका को और मजबूत करना है।

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सरकार का तर्क
विधेयक के अनुसार, अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया में समय लग सकता है, जिससे महिला प्रतिनिधित्व में देरी हो सकती है। इसलिए मौजूदा जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर इस प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया गया है, ताकि महिलाओं की भागीदारी जल्द सुनिश्चित की जा सके। सरकार का मानना है कि यह कदम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाएगा।

नए चुनावों पर असर
प्रस्ताव के मुताबिक, परिसीमन आयोग की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद होने वाले आम चुनाव और उपचुनावों में यह नई व्यवस्था लागू होगी। सूत्रों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया देश की बढ़ती जनसंख्या और समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है। इससे संसदीय लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की कोशिश की जाएगी।


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