पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इस्राइल और लेबनान के बीच 10 दिनों के सीजफायर पर सहमति बन गई है। हालांकि, उनके बयान में लेबनान स्थित हिजबुल्ला समूह का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिसके साथ इस्राइल लंबे समय से संघर्ष में है।
अमेरिका की मध्यस्थता में समझौता
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मेरी अभी लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन और इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बहुत अच्छी बातचीत हुई। जिसके बाद दोनों देशों ने शांति की दिशा में कदम बढ़ाते हुए सीजफायर पर सहमति जताई। यह अस्थायी सीजफायर शाम 5 बजे ईस्टर्न टाइम (भारत में 17 अप्रैल की सुबह 2:30 बजे) से लागू होगा। उन्होंने कहा ‘दुनिया भर में नौ युद्धों को सुलझाना मेरे लिए सम्मान की बात रही है और यह मेरा 10वां होगा, तो चलिए इसे पूरा करते हैं।’
शर्त के बाद बनी सहमति
बताया जा रहा है कि लेबनान की ओर से यह साफ संदेश दिया गया था कि जब तक जमीनी स्तर पर संघर्ष विराम लागू नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की सीधी बातचीत संभव नहीं है। इस रुख के बाद कूटनीतिक प्रयास तेज हुए और अंततः दोनों देशों ने सीजफायर पर सहमति जताई।
34 साल बाद आमने-सामने हुई बातचीत
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि 34 वर्षों में पहली बार वॉशिंगटन डीसी में आमने-सामने मिले। इस बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद रहे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने उपराष्ट्रपति और सैन्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस अस्थायी सीजफायर को स्थायी शांति में बदलने के लिए दोनों देशों के साथ काम करें।
दोनों देशों के बीच हो चुकी है त्रिपक्षीय बैठक
इससे पहले मंगलवार को अमेरिका ने इस्राइल और लेबनान के बीच एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक की मेजबानी की, जो 1993 के बाद पहली उच्च-स्तरीय पहल थी। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस बैठक में प्रत्यक्ष वार्ता शुरू करने, युद्धविराम लागू करने, सुरक्षा सहयोग बढ़ाने और व्यापक शांति ढांचे की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी।
बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, काउंसलर माइकल नीडहैम, लेबनान में अमेरिकी राजदूत लिसा ए. जॉनसन, अमेरिका में इस्राइल के राजदूत येचियल लेटर और अमेरिका में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवावाद शामिल हुए।









