रामनगर- डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल ने रुकवाया, गर्जिया मंदिर का सुरक्षात्मक कार्य

Spread the love

 

रामनगर के प्रसिद्ध गर्जिया देवी मंदिर के सुरक्षात्मक कार्य पर डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल का असर पड़ने लगा है। इंजीनियर्स ने चल रहे सुरक्षात्मक कार्य को रुकवा दिया है। इस पर मंदिर के पुजारियों ने नाराजगी जताते हुए धार्मिक व देवी आपदा के कार्य में हस्तक्षेप ना करने को कहा है। वहीं विशेषज्ञों ने निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ने पर चिंता जताई है।

रामनगर का गर्जिया मंदिर हिंदू धर्म की आस्था का केंद्र है। यहा हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में बारिश और बाढ़ से मंदिर का टीला कमजोर हो गया था। वहीं मंदिर बाढ़ से बचाने के लिए मंदिर के चारों ओर लगभग 11 करोड़ की लागत से सीढ़ीनुमा सीसी ब्लॉक बनाने का कार्य किया जा रहा है। मौजूदा समय में मंदिर के चारों ओर बुनियाद के लिए 20 फिट से अधिक गहरी खाई खोदी गई है, लेकिन डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल के चलते निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। ऐसे में विशेषज्ञों ने कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने पर मंदिर पर संकट खड़ा होने की आशंका जताई है। उनका कहना है कि हल्की बारिश से खुदी हुई बुनियाद में पानी भर सकता है। जो मंदिर के टीले में मिट्टी का कटाव कर उसे कमजोर बना सकता है।

27 सूत्रीय मांगों को लेकर गर्जिया मंदिर पहुचें इंजीनियर्स
रामनगर में बृहस्पतिवार को गर्जिया मंदिर के टीले में चल रहे सुरक्षात्मक कार्य को रुकवाने के लिए इंजीनियर्स संघ के पदाधिकारी पहुंचे। उन्होंने कार्य को रुकवाते हुए 27 सूत्रीय मांगें पूरी होने तक कार्य को बंद रखने को कहा। इस दौरान विशेष शुक्ला, बीएस भंडारी, तनुजा, चंद्रिका बिष्ट, हर्षवर्धन पाठक, नाजिम हुसैन, मयंक राणा, राजीव कुमार आदि मौजूद रहे।

मिट्टी की अस्थिरता बन सकती है खतरा
उत्तराखंड चैप्टर भारतीय आर्किटेक्ट संस्थान के अध्यक्ष एमएस नेगी ने बताया कि गर्जिया मंदिर की परियोजना की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए, काम को रोके रखना उचित नहीं है, खासकर तब जब पहाड़ी क्षेत्र में स्थित मंदिर की नींव पर खुदाई की जा रही हो। नदी तट के निकट होने और आसपास की मिट्टी की अस्थिरता के कारण स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी है। मानसून सीजन नजदीक आ रहा है, ऐसे में पहाड़ी की अस्थिरता को गंभीर खतरा हो सकता है। लंबी देरी मंदिर संरक्षण कार्यों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है और परियोजना के समय पर पूरा होने में बाधा उत्पन्न कर सकती है।

मंदिर के टीले का सुरक्षात्मक कार्य काफ़ी संवेदनशील कार्य है। इसे हड़ताल का हिस्सा ना बनाया जाए। मानसून सीजन नजदीक है। निर्माण कार्य में देरी के चलते आस्था का यह केंद्र केवल इतिहास में ही रह जाएगा।– मनोज पांडेय, पुजारी, गर्जिया देवी मंदिर

और पढ़े  भीमताल- समुदाय विशेष के युवक की गिरफ्तारी न होने से भाजपाइयों और व्यापारियों में उबाल, बाजार बंद कर लगाया जाम

देवीय आपदा के कार्य को हड़ताल के चलते रोके जाना ग़लत है। गर्जिया मंदिर के टीले का कार्य काफ़ी संवेदनशील है। इसे शुरू करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारी से बात कर कार्य शुरू कराया जाएगा।– गोपाल सिंह चौहान, एसडीएम, रामनगर


Spread the love
  • Related Posts

    रुड़की- नदी में नहाने गए 13 साल के बच्चे को मगरमच्छ ने मार डाला, शरीर पर दांत से काटने के मिले निशान

    Spread the love

    Spread the loveक्षेत्र के ग्राम बंजारेवाला में नदी में नहाने गए किशोर पर मगरमच्छ ने हमला बोल दिया जिससे उसकी मौत हो गई। शुक्रवार को किशोर का शव नदी में…


    Spread the love

    टिहरी- गंगोत्री जा रहे यात्रियों से भरे टेंपो ट्रैवलर के हुए ब्रेक फेल, पहाड़ी से टकराया

    Spread the love

    Spread the love   दिल्ली से गंगोत्री जा रहा एक टेंपो ट्रैवलर नगुन-सुवाखोली मोटर मार्ग पर नागराजा धार के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार पांच यात्री…


    Spread the love