सुप्रीमकोर्ट की बाल तस्करी पर सख्त टिप्पणी, राज्यों को कहा- तुरंत कदम नहीं उठाए तो हालात होंगे बेकाबू

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देश में बढ़ते बाल तस्करी के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि संगठित गिरोह देशभर में सक्रिय हैं और अगर राज्य सरकारों व केंद्र शासित प्रदेशों ने तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

 

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत निगरानी कर सकती है, लेकिन वास्तविक कार्रवाई राज्य सरकार, पुलिस और संबंधित एजेंसियों को ही करनी होगी। कोर्ट ने इस मुद्दे पर राज्यों के लापरवाह रवैया पर नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि कुछ मामलों में बच्चों की बरामदगी से यह स्पष्ट है कि समस्या से निपटा जा सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

 

2025 के फैसले का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल 2025 के अपने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस निर्णय में संगठित तस्करी नेटवर्क को तोड़ने के लिए कई संस्थागत सुधारों के निर्देश दिए गए थे। इनमें तस्करी के मामलों में छह महीने के भीतर दिन-प्रतिदिन सुनवाई कर ट्रायल पूरा करना, एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स (AHTUs) को मजबूत करना और जांच प्रक्रिया में सुधार करना शामिल था।

राज्यों को क्या दिए निर्देश?

इसके अलावा, कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया था कि वे तस्करी के संभावित हॉटस्पॉट की पहचान और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समितियां बनाएं और लापता बच्चों के मामलों को तस्करी मानकर जांच शुरू करें, जब तक कि अन्यथा साबित न हो।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कई राज्यों द्वारा दाखिल अनुपालन रिपोर्ट सिर्फ औपचारिकता हैं। बुधवार को सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि मध्य प्रदेश, गोवा, हरियाणा, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और पंजाब ने अभी तक तय प्रारूप में रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।

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लापरवाही हुई तो संबंधित राज्यों को किया जाएगा डिफॉल्टर घोषित

मध्य प्रदेश के गृह सचिव ने देरी पर माफी मांगी, जिस पर कोर्ट ने अंतिम मौका देते हुए चेतावनी दी कि आगे भी लापरवाही बरती गई तो संबंधित राज्यों को डिफॉल्टर घोषित किया जाएगा। पीठ ने यह भी बताया कि कम से कम 15 राज्यों ने अब तक तस्करी प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी के लिए आवश्यक समितियां गठित नहीं की हैं। मामले की अगली सुनवाई अब 29 अप्रैल को होगी।


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