नकली दवाएं बनाकर बेचने के आरोप में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने सबसे पहले निखिल अरोड़ा उर्फ सन्नी को दबोचा। इससे पूछताछ के बाद टीम आरोपी शिवम त्यागी के घर पहुंची तो वहां पुलिस को कुछ नहीं बरामद हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर शिवम ने बताया कि पुलिस के डर से उसने करीब 10 फीट गहरा गड्ढा खोदकर दवाओं को दफना दिया है। टीम ने जेसीबी मशीन के जरिये शिवम की बताई जगह पर खुदाई कराई तो करीब 40 हजार टैबलेट और कैप्सूल दफन मिले।
100 रुपये एमआरपी की दवा बनाने में महज 30 पैसे का खर्चा
छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी निखिल अरोड़ा का भागीरथ पैलेस में थोक में दवा बेचने का पुराना कारोबार है। वह लभभग सभी नामी कंपनियों की दवाएं बेचता था। निखिल ने खुलासा किया है कि वह पिछले कई साल से शिवम, मयंक और मोहित के संपर्क में था। यह तीनों ही उसे दवाएं सप्लाई करते थे। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपियों ने खुलासा किया है कि 100 रुपये एमआरपी की दवा बनाने में महज 30 पैसे का खर्चा आता है। बाद में इन दवाओं को एमआरपी के 20 से 25 फीसदी कीमत पर होलसेलर को बेच दिया जाता था। इस तरह मोटा मुनाफा कमाया जाता था। जांच के दौरान आरोपियों ने बताया है कि वह लगभग सभी कंपनियों की दवा बनाकर बेचते थे।









