LPG: ‘डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से बचें’, पेट्रोल-गैस सप्लाई पर नए नियम, जानें..

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण देश में ईंधन का संकट गहराने वाला है? इस पर स्थिति साफ करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम जनता को आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के कारण सप्लाई चेन को सुव्यवस्थित रखने के लिए गैस बुकिंग और डिलीवरी के नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं।

 

आइए, जरूरी सवालों के जवाब के जरिए आसान भाषा में समझते हैं इन बदलावों का आम आदमी पर क्या असर होगा?

 

सवाल: क्या देश में पेट्रोल-डीजल या रसोई गैस की किल्लत होने वाली है?

जवाब: नहीं, वर्तमान में देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में पेट्रोल-डीजल की खरीदारी या एलपीजी की अनावश्यक बुकिंग न करें। भू-राजनीतिक हालात के कारण सप्लाई पर असर जरूर पड़ा है, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। आपूर्ति की स्थिरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 4 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को देशभर में 55 लाख घरेलू एलपीजी सिलेंडर डिलीवर किए गए।

सवाल: गैस डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से क्यों मना किया जा रहा है और बुकिंग के नए नियम क्या हैं?

जवाब: सरकार ने नागरिकों को स्पष्ट सलाह दी है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाने से बचें और गैस बुकिंग के लिए केवल डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें। वर्तमान में इंडस्ट्री के स्तर पर 94% एलपीजी बुकिंग ऑनलाइन हो रही है। मांग को नियंत्रित करने के लिए, शहरी क्षेत्रों में बुकिंग का अंतराल 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 45 दिन तक कर दिया गया है। डिस्ट्रीब्यूटर स्तर पर गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) आधारित डिलीवरी को फरवरी 2026 के 53% से बढ़ाकर 86% कर दिया गया है।

सवाल: गैस आपूर्ति में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है और प्रवासी मजदूरों का क्या?

जवाब: सरकार ने घरेलू एलपीजी और पीएनजी के साथ-साथ अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। राज्यों ने यह स्पष्ट किया है कि प्रवासी मजदूरों के लिए एलपीजी आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है। राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के साथ मिलकर पांच किलो वाले एलपीजी सिलेंडरों का वितरण प्रबंधित कर सकते हैं।

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सवाल: एलपीजी की मांग कम करने के लिए सरकार ने क्या वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं?

जवाब: आम जनता को पीएनजी, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकटॉप जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए मिट्टी के तेल और कोयले को विकल्प के रूप में पेश किया गया है। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके नियमित कोटे के ऊपर 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है। वहीं, कोयला मंत्रालय ने छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं के लिए राज्यों को अधिक कोयला आवंटित करने का आदेश जारी किया है।

सवाल: सरकार ने आम लोगों से क्या अपील की है?

जवाब: पेट्रोलियम सचिव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों के साथ बैठक कर ईंधन आपूर्ति की समीक्षा की है और राज्यों को घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए जमाखोरी और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर सख्त निगरानी रखने का निर्देश दिया है। सरकार ने आम लोगों से सभी अफवाहों से बचने, केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने और ऊर्जा संरक्षण का प्रयास करने की अपील की है।

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