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मुख्यमंत्री योगी ने गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कन्या पूजन किया गया। उन्होंने मां सिद्धिदात्री की पूजा की और नौ छोटी कन्याओं के पैर धोकर, उन्हें तिलक लगाकर, चुनरी ओढ़ाकर और भोजन (प्रसाद) कराकर आशीर्वाद लिया, जो नारी शक्ति के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, मां दुर्गा के नौ दिनों के अनुष्ठान की पूर्णाहुति आज होगी। नवरात्रि की नवमी तिथि सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली, सुख और समृद्धि को लाने वाली, खुशहाली प्रदान करने वाली तिथि मैं इस अवसर पर प्रदेशवासियों को नवरात्रि की शुमकामनाएं देता हूं। उन सबके जीवन में मांं की कृपा सदैव बनी रहे, उनके जीवन में खुशी और समृद्धि हो इसकी शुमकामनाएं मैं प्रदेशवासियों को देता हूं। नवमी तिथि पर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का पावन जन्म उत्सव भी रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम भारत के सनातन धर्म की परंपरा में भारतीय जीवन पद्धति के एक अत्यंत आदर्श के रूप में हर भारतीय के लिए सदैव प्रेरणा रहे हैं।
चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि पर गोरखनाथ मंदिर की शक्तिपीठ में मां सिद्धिदात्री की आराधना के बाद सीएम योगी, देवी स्वरूपा कन्याओं का पांव पखारकर उनका पूजन किया। उन्हें भोजन कराने के साथ दक्षिणा व उपहार प्रदान किया, कन्या पूजन के साथ उन्होंने बटुक भैरव का भी पूजन किया। कन्या पूजन का अनुष्ठान सुबह से शुरू हुआ। नवरात्र अनुष्ठान की पूर्णता के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामनवमी पर गोरखनाथ मंदिर परिसर में दोपहर में श्रीराम जन्मोत्सव मनाएंगे।
अष्टमी तिथि पर मुख्यमंत्री व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार रात गोरखनाथ मंदिर स्थित शक्तिपीठ में विधि विधान से मां महागौरी की पूजा अर्चना की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार, हवन व आरती के साथ मुख्यमंत्री ने अनुष्ठान पूर्ण किया और मां आदिशक्ति जगतजननी से प्रदेशवासियों के मंगल की प्रार्थना की।
चैत्र नवरात्र के पहले ही दिन से गोरखनाथ मंदिर में देवी आदिशक्ति भगवती के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना का क्रम जारी है। बुधवार को गोरखपुर आए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवरात्र की अष्टमी तिथि पर बृहस्पतिवार रात में मां महागौरी की विधि विधान से आराधना की। इसके बाद उन्होंने गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुसार अष्टमी का हवन किया। आरती व प्रसाद वितरण के साथ महाष्टमी की आराधना पूर्ण हुई।