दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर में ऐतिहासिक पल आज, 108 फीट ऊंची नीलकंठ वर्णी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा

 

भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विरासत के प्रतीक के रूप में विश्वभर में विख्यात स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर आज यानी 26 मार्च को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा। वैश्विक बीएपीएस संस्था के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज यहां 108 फीट ऊंची तपोमूर्ति श्री नीलकंठ वर्णी (भगवान स्वामीनारायण) की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करेंगे। पंचधातु से बनी यह मूर्ति विश्व में अपनी तरह की पहली मूर्ति है, जिसमें भगवान को एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करते हुए दर्शाया गया है। यह उनकी कठोर साधना का प्रतीक है। इस भव्य आयोजन की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं।

 

महंत स्वामी महाराज 19 मार्च को दिल्ली पहुंचे थे। 21 मार्च को उनके स्वागत में विशेष सभा आयोजित की गई। 22 मार्च को पंचकूला और कुरुक्षेत्र में बने नए बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिरों में मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ। इसी दौरान श्रद्धालुओं और संतों ने उनके सानिध्य में पुष्प होली का उत्सव भी मनाया।

कौन हैं तपोमूर्ति नीलकंठ वर्णी?
भगवान स्वामीनारायण ने मात्र 11 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर मानव कल्याण के लिए पूरे भारत में आध्यात्मिक यात्रा शुरू की थीं। सात वर्षों में उन्होंने करीब 12,000 किलोमीटर की यात्रा की और हिमालय, बद्रीनाथ, केदारनाथ, कैलाश-मानसरोवर, मुक्तिनाथ (नेपाल), कामाख्या, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, नासिक, पंढरपुर और द्वारका जैसे तीर्थों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें ‘नीलकंठ वर्णी’ के नाम से जाना गया।

 

मूर्ति की विशेषताएं

 

  • यह मूर्ति 108 फीट ऊंची है और 8 फीट ऊंचे चबूतरे पर स्थापित की गई है।
  • इसे बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा।
  • यह दुनिया की सबसे ऊंची ‘एक पैर पर खड़ी’ प्रतिमा है।
  • अक्षरधाम के शिल्पकार साधुओं, करीब 50 कारीगरों और अनेक स्वयंसेवकों ने मिलकर इसे तैयार किया है।
  • यह भव्य प्रतिमा त्याग, करुणा, सेवा, समर्पण और मानवता जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का संदेश देती है।
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विश्व शांति महायज्ञ से हुआ आयोजन का आगाज
इस आयोजन की शुरुआत 25 मार्च की सुबह श्री नीलकंठ वर्णी विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुई। अक्षरधाम परिसर में वैदिक विधि से संपन्न इस यज्ञ में दुनिया भर से आए 300 से अधिक संत शामिल हुए, जिनमें ब्रिटेन, फ्रांस, अफ्रीका, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के संत भी शामिल हैं।

महंत स्वामी महाराज ने इस अवसर पर विश्व शांति, एकता और संघर्षों के अंत के लिए प्रार्थना की। उन्होंने सभी लोगों के बीच सद्भाव और मित्रता का संदेश देते हुए शांति के प्रतीक सफेद कबूतर भी उड़ाए। 26 मार्च को सुबह 6 बजे मुख्य प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान शुरू होगा, जिसके बाद इस भव्य मूर्ति का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा।

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