मेरठ के ब्रह्मपुरी के सौरभ हत्याकांड में दोषी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। सौरभ राजपूत की हत्या की दोषी पत्नी मुस्कान को मथुरा जेल में फांसी दी जा सकती है। यहां प्रदेश का एकमात्र महिला फांसी घर है। हालांकि मृत्युदंड के मामले में सत्र न्यायालय के फैसले की उच्च न्यायालय से पुष्टि आवश्यक होती है।
इसके बाद अपील और दया याचिका जैसी कानूनी प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं। इसलिए फांसी की तारीख और सजा पर अमल की स्थिति आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। जेल अधीक्षक अंशुमन गर्ग ने बताया है कि अगर कानूनी प्रक्रिया में कोई अड़चन नहीं आई तो मुस्कान को यही फांसी दी जाएगी।
शबनम को दी जानी है फांसी
जेल मैनुअल के तहत अभी मुस्कान के साथ रहेगी बच्ची
दरअसल मुस्कान ने नवंबर 2025 में जेल में ही अपनी छोटी बेटी को जन्म दिया था। वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक, कोई भी बच्चा छह साल की उम्र तक अपनी मां के साथ जेल में रह सकता है।
मुस्कान की 10 महीने की बेटी राधा फिलहाल उसके साथ ही रहेगी और जब उसकी फांसी की तारीख तय होगी, तब बच्ची के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मुस्कान और साहिल को मेरठ जेल में ही रखा जाएगा या कहीं और स्थानांतरित (शिफ्ट) किया जाएगा, इस पर कोर्ट का विस्तृत आदेश मिलने के बाद फैसला होगा।
जेल अधिकारियों के मुताबिक, मुस्कान अपनी 10 महीने की बेटी के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित है और अक्सर इस बारे में सवाल पूछती है। इसके साथ ही वह पिछले तीन-चार दिनों से अपनी 7 साल की बड़ी बेटी (पीहू) से मिलने की गुजारिश कर रही है, लेकिन जेल नियमों के कारण अभी तक बड़ी बेटी को उससे मिलवाने जेल नहीं लाया गया है।
मुस्कान का अगला पता बैरक नंबर 12बी और साहिल का बैरक नंबर 15
सौरभ हत्याकांड मृत्युदंड की सजा के बाद मुस्कान बैरक नंबर 12बी और साहिल बैरक नंबर 15 में रहेगा। अब उन्हें सजायाफ्ता वाले कपड़े पहनने होंगे। मुस्कान क्रीम कलर की साड़ी या सूट पहनेगी और साहिल सफेद रंग के कुर्ता और पाजामा पहनेगा। उन्हें कैदियों का नंबर भी मिलेगा। अगर न्यायालय के आदेश मेें सश्रम कारावास लिखा होगा तो उन्हें मजदूरी भर करनी होगी।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जिला जज का आदेश मिलने के बाद दोनों दोषियों के लिए जेल के नियम बदल जाएंगे। अब उन्हें सजायाफ्ता कैदी की तरह रहना होगा। फिलहाल जिला कारागार में कुल 1983 बंदी हैं। इनमें 378 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें 16 सजायाफ्ता महिलाएं हैं।
दो महिला बैरक हैं। ये एक ही बैरक के दो पार्ट हैं। बैरक नंबर 12ए में विचारधीन बंदी रहती हैं और 12बी में सजायाफ्ता महिला बंदियों को रखा जाता है। साहिल फिलहाल 17 नंबर बैरक में रह रहा है। उसे 15 नंबर बैरक में शिफ्ट किया जाएगा। दोनों के मुलाकात के दिन भी एक माह में 12 से घटाकर चार कर दिए जाएंगे।
अब तक उनसे परिजन एक माह में 12 बार मुलाकात कर सकते थे। अब एक माह में दो बार मुलाकात और दो बार फोन पर बात या फिर चार बार मुलाकात कर सकेंगे। हालांकि मुस्कान से मिलने अब तक कोई परिजन नहीं पहुंचा है।
साहिल से मिलने उसका भाई दिव्यांश और नानी पुष्पा देवी अक्सर जिला कारागार आते हैं। जेल अधीक्षक का कहना है कि दोषी करार दिए जाने के बाद दोनों दोषियों ने खाना कम कर दिया है। वह अब लगभग आधा खाना खा रहे हैं। दोनों तनाव में हैं और चिंतित हैं। वे अन्य बंदियों से अब बात भी कम करते हैं।
कातिल मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी की सजा
मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने पति की हत्या करने वाली मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को बुधवार को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अपने फैसले में न्यायाधीश ने कहा कि प्रजा जब सोती है तब भी कानून जागता है। साहिल और मुस्कान तुमने सौरभ की हत्या की और उसके शव के टुकड़े करके उन्हें छुपा दिया। तुम्हें मृत्युदंड से दंडित किया जाता है। जिला जज के सजा सुनाते ही खचाखच भरे न्यायालय में भारत माता के जयकारे गूंजने लगे।
जिला जज ने 30 सितंबर 2026 को 22 गवाहों के बयान और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर और दोनों पक्षों के वकीलों की बहस सुनने के बाद मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया था।
बुधवार की सुबह सजा के बिंदु पर जिला अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के वकील के बीच बहस हुई। बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि दोनों दोषियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। जेल में भी दोनों का आचरण अच्छा रहा है। इसलिए उन पर रहम किया जाए। बचाव पक्ष ने कोई चश्मदीद गवाह नहीं होने का भी हवाला दिया।
वहीं, मुस्कान और साहिल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी हुई। मुस्कान ने अपनी दोनों छोटी बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए अदालत से रहम की अपील की। कहा कि मेरी दो छोटी-छोटी बेटियां हैं, फैसला देते समय इनके भविष्य का ध्यान रखा जाए।
जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से दलील दी गई कि वारदात किसी उकसावे में आकर अचानक नहीं बल्कि अत्यंत शातिर तरीके से सोच-समझकर साजिश रचकर की गई है। मुस्कान और साहिल ने सौरभ की हत्या करने के बाद दोनों हाथों की कलाइयां काट दीं और सिर धड़ से काटकर अलग कर दिए।







