हर साल 24 मार्च को विश्वभर में टीबी दिवस मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर तपेदिक यानी टीबी के खिलाफ जागरूकता फैलाने, इसके खतरों के बारे में लोगों को जानकारी देने और उपचार व रोकथाम के महत्व को समझाने के लिए समर्पित है।
टीबी एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन सही समय पर जागरूकता और इलाज से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इस साल विश्व टीबी दिवस की थीम क्या है और इस दिन को मनाने का उद्देश्य क्या है, जानते हैं…
क्या है टीबी?
टीबी एक संक्रामक बीमारी है जो फेफड़ों को प्रभावित करती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है। यह बीमारी मुख्य रूप से वायुमार्ग के माध्यम से फैलती है। जब कोई व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो उसमें मौजूद माइक्रोब हवा में फैल जाते हैं और आसपास के स्वस्थ व्यक्ति उन्हें सांस के जरिए शरीर के अंदर ले लेते हैं, जिससे टीबी फैलने का खतरा रहता है।
ऐसे में हम सभी को ये समझने की जरूरत है कि यदि सावधानी और उपचार समय पर न लिया जाए तो टीबी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। संक्रमण फैलने से बचने के लिए मास्क पहनना, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और समय पर इलाज कराना अत्यंत आवश्यक है।
क्या है विश्व टीबी दिवस 2026 की थीम?
साल 2026 में विश्व टीबी दिवस की थीम है: “हां, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं: देशों द्वारा नेतृत्व, लोगों की शक्ति से।” इस थीम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि यदि सरकारें और समाज मिलकर ठोस कदम उठाएं, निवेश करें और सहयोग बनाए रखें, तो टीबी जैसी वैश्विक चुनौती को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है।
क्यों 24 मार्च को ही मनाया जाता है विश्व टीबी दिवस?
विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1882 में रॉबर्ट कोच ने टीबी के कारण यानी कि माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की थी। उनकी इस खोज ने टीबी के निदान और उपचार में एक नई राह खोली। इस खोज के बाद ही 1982 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस एंड लंग डिजीज ने इस दिन को 24 मार्च को मनाने का एलान किया।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।








