पिछले दो महीने से दुनिया के तमाम हिस्सों से कोविड-19 के घटते मामलों की खबरें सामने आ रही थीं, इस बीच कोरोना ने एक बार फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया है। हाल ही में सामने आए कोरोना के नए वैरिएंट्स ने स्वास्थ्य संगठनों की चिंता और बढ़ा दी है। चीन के कुछ शहरों से एक बार फिर कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक चीन के लांझू शहर में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन लगा दिया गया है। इस आदेश के साथ ही करीब 4 लाख से अधिक लोग एक बार फिर से घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।
रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के हाल ही में सामने आए दो वैरिएंट्स के कारण चीन सहित कई देशों में हालात फिर से खराब होने लगे हैं। हालिया रिपोर्टस के मुताबिक कोरोना के नए वैरिएंट AY.4.2 के भारत में भी मामले सामने आने के बाद हलचल बढ़ गई है। मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी इस वैरिएंट को लेकर चिंता जताई है। आइए आगे की स्लाइडों में इन दोनों वैरिएंट्स के बारे में जानते हैं।
हाल ही में भारत में सामने आए कोरोना के नए वैरिएंट AY.4.2 ने चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि विशेषज्ञों की एक टीम नए कोरोना वेरिएंट AY.4.2 की जांच कर रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और एनसीडीसी की टीमें अलग-अलग वेरिएंट का अध्ययन और विश्लेषण कर रही हैं। फिलहाल भारत में इसके मामले काफी कम हैं।
यूके में कोरोना के नए वैरिएंट AY.4.2 के बढ़ते केस के बाद भारत में भी इसके मामले सामने आए हैं। अब तक के अध्ययनों के आधार पर कोरोना के इस नए रूप से बेहद खतरनाक मान रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना का यह नया वैरिएंट मूल डेल्टा वैरिएंट से 10 फीसदी अधिक संक्रामक हो सकता है। इस नए वैरिएंट में कुछ ऐसे म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे मानव कोशिकाओं में अधिक आसानी से प्रवेश करने के सक्षम बनाते हैं। फिलहाल भारत में इस नए वैरिएंट के मामले 0.1 फीसदी से भी कम हैं।
कोरोना के नए वैरिएंट R.1 ने भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टस के मुताबिक जिस तरह से इस वैरिएंट की प्रकृति देखने को मिली है, उस आधार पर माना जा रहा है कि यह काफी संक्रामक हो सकता है। पिछले महीने रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने साप्ताहिक रिपोर्ट में बताया कि कोरोना का यह वैरिएंट खतरनाक हो सकता है। R.1 वैरिएंट को लेकर किए गए अब तक के अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह शरीर में वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को आसानी से मात देने की क्षमता रखता है।









