पूरे देश में आज 16 मई को वट सावित्री व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ रखा जा रहा है। यह पर्व विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू धर्म में वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक सुख के लिए रखा जाता है।
इस दिन महिलाएं सुबह स्नान कर सोलह श्रृंगार करती हैं और वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करती हैं। वट वृक्ष को लंबी आयु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं पेड़ की परिक्रमा कर कच्चा सूत बांधती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं।
वट सावित्री व्रत केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का भी प्रतीक माना जाता है। इस खास अवसर पर सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को शुभकामना संदेश भेजकर सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।






