देहरादून- बीकेटीसी ने तय किया, केदारनाथ धाम की रूप छड़ी अब देवभूमि से नहीं जाएगी बाहर

भगवान केदारनाथ की रूप छड़ी को राज्य के बाहर ले जाने के विवाद के बीच श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की बैठक में तय हुआ कि अब रूप छड़ी देवभूमि से बाहर नहीं जाएगी। वहीं, धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज ने बीकेटीसी अध्यक्ष को पत्र भेजा है, जिसमें केदारनाथ धाम के रावल के द्वारा नए रावल की घोषणा करने और रूप छड़ी को बाहर भेजे जाने के मामले में जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।

बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की बैठक बीते दिन हुई थी, इसमें अन्य विषयों के साथ रूप छड़ी को बाहर जाने का मुद्दा उठा था। बैठक में रूप छड़ी को बाहर ले जाने पर सदस्यों ने रोष व्यक्त किया। वहीं, कैबिनेट मंत्री महाराज का एक पत्र बीकेटीसी में पहुंचा है। इसमें महाराज ने कहा कि श्री केदारनाथ धाम के रावल के महाराष्ट्र नांदेड में एक कार्यक्रम में नए रावल की घोषणा करने और उसमें ऐतिहासिक रूप छड़ी और बहुमूल्य पवित्र सामग्रियों को भेजे जाने संबंधी जानकारी मीडिया के माध्यम से 13 फरवरी से लगातार प्रचारित हो रही है।

इसके अलावा पुष्ट माध्यमों से अवगत कराया गया है कि संबंधित गतिविधियां सामान्य नियमों और परपंराओं के विपरीत है। पत्र में आगे कहा गया है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री की केदारनाथ धाम के प्रति विशेष लगाव व विकास के दृष्टिगत लगातार हर गतिविधि पर ध्यान दिया जाता है। धाम के कपाट खुलने को है, इस घटना से एक विपरीत संदेश देश में जा रहा है।

 

पत्र में कहा गया है कि प्रकरण की जानकारी होने पर मंदिर समिति के स्तर पर जल्द जांच कर बताया जाए। पर अभी तक कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है। परंपराओं से जुड़े विषय की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सक्षम स्तर से जल्द जांच की अनिवार्य रूप से बताया जाए। इस संबंध में बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि बैठक में सदस्यों ने कहा कि रूप छड़ी को बाहर ले जाने की परंपरा नहीं रही है। इससे बोर्ड सदस्यों में रोष था, रूप छड़ी को बाहर ले जाने की परंपरा भी नहीं रही है। तय अब रूप छड़ी देवभूमि से बाहर नहीं जाएगी। कैबिनेट मंत्री महाराज का पत्र मिला है, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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वर्ष-2000 में बाहर ले ले जाने की मांगी गई थी अनुमति
रूप छड़ी को देवभूमि से बाहर ले जाने की बात वर्ष 2000 में भी आई थी। उस समय बीकेटीसी के खंचाजी ने पत्र बीकेटीसी के ईओ को आख्या भेजी थी। इसमें कहा गया था कि रावल ने अपने आवेदन में दक्षिण भारत को ले जाने के लिए सामान की सूची दी है। वह परंपरा के अनुसार अभी तक मंदिर के खजाने से कभी बाहर नहीं दी गई है।

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