बकुलिया में आयोजित नवीन गृह प्रवेश एवं होली मिलन समारोह ने विधानसभा लालकुआं की राजनीति में समय से पहले चुनावी गर्माहट ला दी है। सामाजिक आयोजन के बहाने उठे बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के मुद्दे ने अब क्षेत्र की सियासत को नई दिशा दे दी है। कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व CM भगत सिंह कोश्यारी और उनके भतीजे दीपेंद्र कोश्यारी की संयुक्त मौजूदगी को राजनीतिक गलियारों में बेहद अहम संकेत माना जा रहा है।
जमरानी बांध का जिक्र कर दिया बड़ा राजनीतिक संदेश!
भगत सिंह कोश्यारी ने बिंदुखत्ता के लंबे समय से लंबित राजस्व ग्राम मुद्दे को जनता की भावनाओं से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि प्रक्रियाएं भले लंबी हों, लेकिन समाधान संभव है। उन्होंने जमरानी बांध परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वर्षों पुरानी योजना आखिरकार आगे बढ़ी, उसी प्रकार बिंदुखत्ता भी एक न एक दिन जरूर राजस्व गांव बनेगा। कोश्यारी का यह बयान राजनीतिक तौर पर भविष्य के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
भतीजे की सक्रियता ने बढ़ाई चर्चा!
दीपेंद्र कोश्यारी ने भी जनता के अधिकारों और मूलभूत सुविधाओं की लड़ाई जारी रखने की बात कही। उन्होंने संकेत दिया कि बिंदुखत्ता के मुद्दे को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए राजनीतिक स्तर पर प्रयास तेज किए जाएंगे।
सामाजिक मंच या सियासी शक्ति प्रदर्शन?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो होली मिलन जैसे सामाजिक कार्यक्रम से संवेदनशील और वर्षों पुराने मुद्दे को उठाया जाना महज संयोग नहीं माना जा रहा।
ताऊ-भतीजे की एक साथ सक्रियता ने लालकुआं विधानसभा में संभावित राजनीतिक दावेदारी और नए समीकरणों की चर्चाओं को हवा दे दी है।
क्या यहीं से शुरू हुई 2027 की पटकथा?
होली के रंग, गृह प्रवेश का मंच और राजस्व गांव का मुद्दा—इन तीनों के संगम ने अब बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—
क्या लालकुआं विधानसभा में 2027 चुनाव का शंखनाद सामाजिक आयोजनों से ही शुरू हो चुका है?
फिलहाल इतना तय है कि इस आयोजन ने यह संदेश जरूर दे दिया है कि आने वाले समय में बिंदुखत्ता राजस्व गांव का मुद्दा सिर्फ विकास नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का केंद्र बनने वाला है।
होली के बहाने दिया गया यह सियासी संदेश अब लालकुआं की राजनीति में दूर तक असर डालता नजर आ रहा है।






