अयोध्या: रंग, रस और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना दशरथ महल

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 रामनगरी स्थित दशरथ महल में बुधवार को फूलों की होली का अनुपम उत्सव बड़े ही भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। बड़ा स्थान परिसर रंग, रस और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना। जैसे ही संतों और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर पुष्पवृष्टि की, वातावरण गुलाब, गेंदा और कनेर की सुगंध से महक उठा। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं त्रेतायुग की छटा पुनः साकार हो उठी हो।

दशरथ महल के गर्भगृह के सम्मुख जगमोहन में मंदिर के महंत बिंदुगद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य के संयोजन में सजी गीत-संगीत की महफिल ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। मृदंग की थाप, झांझ की झंकार और हारमोनियम की मधुर तान पर जब होली के पारंपरिक भजन गूंजे, तो श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। होरी खेले रघुवीरा अवध में… जैसे होली गीतों ने पूरे परिसर को राममय बना दिया। संत-महात्माओं ने भी सादगी और आनंद के साथ फूलों की होली खेली। संत जैसे ही एक-दूसरे पर पुष्पों की वर्षा करते पूरा परिसर जयश्रीराम के उद्घोष से गूंज उठता।

महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य ने कहा कि फूलों की होली ने यह संदेश दिया कि रंगों से अधिक महत्वपूर्ण है मन का रंग, प्रेम, श्रद्धा और समर्पण का रंग। उन्होंने समाज में आपसी भाईचारा, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान किया। इस अवसर पर महंत जन्मेजय शरण, द्वाराचार्य महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत अवधेश दास, महंत गिरीश दास, महंत रामशंकर दास रामायणी, संत एमबीदास, अधिवक्ता रामशंकर शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

मंदिरा में अबीर-गुलाल से हो रही भगवान की सेवा
अयोध्या। वसंत पंचमी से रामनगरी में शुरू हुआ होली का उत्सव शुक्रवार को रंगभरी एकादशी से चटख हो जाएगा। रामनगरी के हजारों मंदिरों में भगवान के विग्रह की रोजाना अबीर-गुलाल से सेवा हो रही है। मंदिरों में होली के पदों का भी गायन हो रहा है। गीत-संगीत व अध्यात्म की त्रिवेणी में भक्त गोता लगा रहे हैं। वसंत पंचमी से ही मंदिरों में भगवान के विग्रह को अबीर-गुलाल अर्पित करने का क्रम शुरू हो गया था। मंदिरों में भगवान को मौसम के अनुकूल रेशमी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं। देशी घी की बाती की जगह फूल से आरती की जा रही है, जिससे भगवान को ताप न लगे। इसके अलावा दही और मौसमी फलों आदि से सेवा की जा रही है।

रोजाना भगवान को सुनाए जा रहे होली के पद
आचार्य पीठ लक्ष्मण किला और उसकी परंपरा से जुड़े मंदिरों में वसंत उत्सव की धूम है। लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण ने बताया कि वसंत पंचमी से हर दिन ठाकुर जी को गुलाल अर्पित किया जा रहा है। चंदन के इत्र से भी सेवा की जाती है। रोजाना भगवान को होली के पद भी सुनाए जा रहे हैं। कई दशकों से कनक बिहारी सरकार को पद सुनाने वाले संत एमबी दास ने बताया कि वसंत पंचमी से कनक बिहारी सरकार की सेवा में अबीर-गुलाल को भी शामिल किया गया है। रोजाना शाम को होली के पद भी उन्हें सुनाए जाने लगे हैं।

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