तमिलनाडु में मतदाता सूची में बड़ी छंटनी: SIR के बाद हटे 74 लाख से ज्यादा नाम, अब राज्य में कितने मतदाता?

Spread the love

मिलनाडु में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस बड़े अभियान में 74 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। संशोधित सूची के अनुसार अब राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 5 करोड़ 67 लाख रह गई है। जिला निर्वाचन अधिकारी अलग-अलग जिलों के आंकड़े जारी कर रहे हैं। यह कार्रवाई चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की गई है। इनमें पुरुष मतदाता 2,77,38,925, महिला मतदाता 2,89,60,838 और तीसरे लिंग के 7,617 मतदाता हैं।

 

इस पुनरीक्षण का मकसद मतदाता सूची को साफ और सही बनाना है। अधिकारियों के अनुसार हटाए गए नामों में बड़ी संख्या मृत मतदाताओं की है। करीब 66 लाख नाम अलग-अलग कारणों से हटाए गए हैं। जिन लोगों का नाम गलती से कट गया है या जो नए मतदाता हैं, वे फॉर्म-6 भरकर दोबारा आवेदन कर सकते हैं। आयोग का कहना है कि हर पात्र नागरिक को वोट देने का अधिकार मिलेगा, लेकिन सूची में गलत या दोहराव वाले नाम नहीं रखे जाएंगे।

नोटिस जारी, 10 दिन का मौका
पुनरीक्षण के दौरान 12 लाख 43 हजार 363 लोगों को नोटिस भेजे गए। जिनके नाम, पते या अन्य विवरण में गड़बड़ी मिली, उनसे दस्तावेज और स्व-घोषणा पत्र मांगा गया। हटाए गए नामों की सूची ग्राम पंचायत कार्यालय, ब्लॉक कार्यालय, उपखंड कार्यालय और शहरी वार्ड दफ्तरों में चस्पा की गई। जिनका नाम हटाया गया, उन्हें 10 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराने या स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया।

और पढ़े  असम: वायुसेना विमान हादसे में 5 जवान बलिदान, जोरहाट एयरबेस पर लैंडिंग के दौरान क्रैश हुआ था AN-32 मालवाहक

 

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन
यह पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग के 30 जनवरी के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार की गई। जिन नामों में विरोधाभासी या अधूरी जानकारी मिली, उन्हें कारण सहित सार्वजनिक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। इसलिए हर हटाए गए नाम के पीछे का कारण दर्ज किया गया है।

मतदाता संख्या में बदलाव
बता दें कि इससे पहले  27 अक्तूबर 2025 को सूची में 6,41,14,587 मतदाता शामिल थे। इसके बाद 19 दिसंबर को जारी हुई प्रारंभिक ड्राफ्ट सूची में: 5,43,76,756 मतदाता रह गए थे। फिर दावे और आपत्तियों के दौरान 27.53 लाख नाम जोड़े गए और 4.23 लाख नाम हटाए गए।

क्या बोलीं राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी
राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने सोमवार को अंतिम मतदाता सूची जारी के बाद एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 97.37 लाख मतदाताओं के नाम विभिन्न श्रेणियों में हटाए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले राज्य में कुल मतदाता संख्या 6.41 करोड़ थी, जो अब घटकर 5.67 करोड़ रह गई है।

पटनायक ने आगे कहा कि 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 7.40 लाख नए मतदाताओं को सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि अब मतदाता सूची का निरंतर अद्यतन तुरंत प्रभाव से शुरू किया जाएगा, ताकि पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।

नौ राज्यों में भी बड़ी कमी
तमिलनाडु के साथ ही नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी एसआईआर का दूसरा चरण पूरा हुआ। इन राज्यों में करीब 8 प्रतिशत मतदाता सूची से हटाए गए। गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार में पहले लगभग 21.45 करोड़ मतदाता थे। अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 19.75 करोड़ रह गई। यानी कुल मिलाकर 1 करोड़ 70 लाख से अधिक नाम कम हुए हैं।

और पढ़े  महंगाई ने तोड़ा 16 महीने का रिकॉर्ड, सोने-चांदी के आभूषणों और टमाटर-अदरक ने बिगाड़ा रसोई का बजट

14 फरवरी को जारी पुडुचेरी की अंतिम सूची में 9 लाख 44 हजार 211 मतदाता दर्ज किए गए। चुनाव अधिकारियों ने साफ कहा है कि हर नागरिक अपने क्षेत्र की अंतिम सूची में अपना नाम जरूर जांचे। अगर नाम नहीं है और व्यक्ति पात्र है, तो वह तुरंत फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करे। आयोग का कहना है कि साफ मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।


Spread the love
  • Related Posts

    भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता: 5 साल के लिए सामाजिक सुरक्षा भुगतान से छूट, 75,000 भारतीय पेशेवरों को होगा लाभ

    Spread the love

    Spread the loveभारत और ब्रिटेन के बीच हुए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत अब भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन में अस्थायी तौर पर भेजे गए कर्मचारियों के लिए पांच वर्ष तक…


    Spread the love

    TMC को झटका: विधानसभा स्पीकर के फैसले पर रोक नहीं, कलकत्ता HC ने किया इनकार

    Spread the love

    Spread the loveपश्चिम बंगाल में ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता(LoP) बनाए जाने के फैसले पर विवाद हो रहा है। विधानसभा स्पीकर के इस फैसले को ममता बनर्जी के खेमे…


    Spread the love