देहरादून- मातृ संस्कार समागम के समापन में पहुंचे CM धामी, बोले- माता ही हमारे संस्कारों की निर्माता

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विश्वमांगल्य सभा के मातृ संस्कार समागम कार्यक्रम में मंगलवार को मौजूदा दौर की चुनौतियों के बीच मातृ शक्ति की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता और तकनीकी बदलाव के चलते जो चुनौतियां सामने खड़ी हैं, उसमें मातृ शक्ति का विजनरी होना जरूरी है ताकि एक अच्छे परिवार से लेकर अच्छे समाज और राष्ट्र का निर्माण संभव हो सके। कार्यक्रम के समापन सत्र में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि माता ही हमारे संस्कारों की निर्माता होती है।

राजकीय दून मेडिकल काॅलेज के सभागार में विभिन्न सत्रों में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इनमें कुछ खास सत्र जनप्रतिनिधि परिवार की माताओं के लिए आयोजित किए गए। विश्वमांगल्य सभा का उत्तराखंड मेें यह पहला कार्यक्रम था, जिसका आयोजन सामाजिक चिंतक गीता धामी के प्रयासों से संभव हुआ। संगठन के राष्ट्रीय परामर्शदाता प्रशांत हरतालकर, वृषाली ताई जोशी के साथ ही विकास फाउंडेशन की अध्यक्ष मृदृला धर्मेंद्र प्रधान, राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा, जनप्रतिनिधि परिवार संपर्क विभाग की अखिल भारतीय संयोजक डाॅ अनुराधा यादव, डाॅ पूजा देशमुख की विभिन्न सत्रों में उपस्थिति रही। संचालन ज्योति कोटिया ने किया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन के निर्णय लेने का अधिकार है, लेकिन परिवार की मूल भावना त्याग, सहयोग, जिम्मेदारी और भावनात्मक जुड़ाव को बनाए रखने की बात कहते हुए आधुनिकता और पारिवारिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मातृ शक्ति सम्मान से गौरवान्वित हुईं सात महिलाएं
दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित विश्व मांगल्य सभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी ने सात मातृ शक्ति का सम्मान किया। विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली इन महिलाओं में ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मंजू टम्टा वसुश्री, कविता मलासी को सम्मानित किया गया।


 

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छह भ अपनाने पर जोर, भारतीयता न हो कमजोर
कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा की अखिल भारतीय संगठन मंत्री डाॅ. वृषाली जोशी ने उपस्थित लोगों से छह भ अपनाने पर जोर दिया। यह छ भ हैं-भाषा, भूषा, भजन, भोजन, भ्रमण और भवन। उन्होंने कहा कि यह सब भारतीय होने चाहिए। विश्वमांगल्या सभा वर्ष 2016 में अस्तित्व में आई है। इसका उद्देश्य बदलते आधुनिक दौर की चुनौतियों के बीच माताओं को भारतीय सनातन संस्कृति के अनुरूप तैयार करना, ताकि वह समाज के व्यापक हित में अपने परिवार को तैयार कर सकें। संगठन का कार्य अभी 35 प्रांतों में चल रहा है। सभा ने 25 प्रांतों में मातृ संस्कार समागम की शृंखला शुरू की है। इस क्रम में अभी देहरादून से पहले उज्जैन और अयोध्या में मातृ संस्कार समागम आयोजित हो चुका है।

कार्यक्रम में गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है और जब सेवा किसी परिवार की परंपरा बन जाती है तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरे समाज की चेतना को जागृत करता है। कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पत्नी और विकास फाउंडेशन की अध्यक्ष मृदुला धर्मेंद्र प्रधान ने संस्कारों पर जोर देते हुए हिमाचल-उड़ीसा के अपने अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि वह हिमाचल की रहने वाली हैं, लेकिन शादी उड़ीसा में हुईं। घर परिवार के ऐसे संस्कार थे कि एडजस्ट करने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

गीता धामी के नेतृत्व में तैयार होगा संगठन
विश्वमांगल्य सभा के इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में तय किया गया कि राज्य में गीता धामी के नेतृत्व में संगठन को खड़ा किया जाएगा। कार्य पद्धति से संबंधित सत्र में जनप्रतिनिधि परिवार संपर्क विभाग की अखिल भारतीय संयोजक डाॅ. अनुराधा यादव ने यह जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में संगठन की कार्य पद्धति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि उत्तराखंड में गीता धामी के नेतृत्व में जिलों में टीमें बनाई जाएंगी।

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