असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान और एक वीडियो विवाद ने पूरे राज्य की सियासत में गर्माहट तेज कर दी है। ऐसे में अब इस पूरे मामले में सीएम सरमा के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी सीपीआई(माकपा) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ भेदभावपूर्ण और आपत्तिजनक बयान दिए हैं। इस मामले को वरिष्ठ वकील निजाम पाशा ने सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई के लिए उठाया।
इस दौरान वकील निजाम पाशा ने कहा कि असम के मुख्यमंत्री का भाषण बेहद परेशान करने वाले हैं। उन्होंने कोर्ट को एक हालिया वीडियो का भी हवाला दिया, जिसमें मुख्यमंत्री को एक खास समुदाय के लोगों की ओर बंदूक से निशाना लगाते हुए दिखाया गया है। वकील ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया जाए और उचित निर्देश दिए जाएं।
आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
सीएम सरमा पर लगाए गए इन आरोपों पर मुख्य न्यायाधीश सीजेआई ने प्रतिक्रिया देते कहा कि चुनाव के समय ऐसे मामलों का अदालत में आना आम बात है। उन्होंने टिप्पणी की कि जब चुनाव आते हैं, तो चुनाव का एक हिस्सा सुप्रीम कोर्ट में लड़ा जाने लगता है। यही समस्या है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम इस पर विचार करेंगे। मुख्य न्यायाधीश की इस टिप्पणी का मतलब है कि कोर्ट इस याचिका को देखेगा और मामले की जांच करेगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस याचिका पर आगे फैसला करेगा।





