संयुक्त राज्य अमेरिका के ओरेगन राज्य के पोर्टलैंड में एक फेडरल जज ने बुधवार को अहम फैसला सुनाया। उन्होंने कहा, ओरेगन में अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंटों को बिना वारंट के अप्रवासी लोगों को गिरफ्तार करना बंद करना होगा, जब तक कि उनके भागने की संभावना न हो।
कोर्ट ने लगाई रोक
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज मुस्तफा कसुभाई ने इस मामले में शुरुआती रोक लगा दी है। यह फैसला एक प्रस्तावित क्लास-एक्शन मुकदमे के बाद आया है। यह मुकदमा होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के उस तरीके के खिलाफ था, जिसमें वे अप्रवासी को देखते ही पकड़ लेते थे। आलोचकों ने इसे “पहले गिरफ्तार करो, बाद में सही ठहराओ” वाली नीति बताया है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े पैमाने पर लोगों को देश से निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच इमिग्रेशन एजेंट बिना कोर्ट वारंट के निजी घरों में घुस रहे हैं। इन कार्रवाइयों ने देश भर के नागरिक अधिकार समूहों की चिंता बढ़ा दी है।
बिना वारंट के गिरफ्तारी नहीं
पिछले हफ्ते इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) के एक्टिंग हेड टॉड लियोन्स ने इस बात पर जोर दिया गया था कि एजेंटों को अपने अधिकारियों से जारी वारंट के बिना गिरफ्तारी नहीं करनी चाहिए, जब तक कि व्यक्ति के भागने का ठोस कारण न हो। इस मामले में जज के सामने सबूत पेश किए गए कि ओरेगन में एजेंटों ने छापों के दौरान बिना वारंट या बिना जांच किए लोगों को गिरफ्तार किया है। इसमें एक वादी, विक्टर क्रूज गेमज की गवाही भी शामिल है।
विक्टर 56 साल के हैं और 1999 से अमेरिका में रह रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनके पास काम करने का वैध परमिट था और वीजा की अर्जी भी पेंडिंग थी। इसके बावजूद उन्हें गिरफ्तार किया गया और तीन हफ्ते तक हिरासत केंद्र में रखा गया।
कोर्ट ने एजेंटों की हरकतों को बताया हिंसक और क्रूर
जज कसुभाई ने कहा कि ओरेगन में एजेंटों की हरकतें हिंसक और क्रूर रही हैं। उन्होंने बताया कि सिविल इमिग्रेशन उल्लंघन के लिए लोगों को हिरासत में लेते समय उन पर बंदूकें तानी गईं, जोकि गलत है। साथ ही जज ने चिंता जताई कि प्रशासन इमिग्रेशन छापों में पकड़े गए लोगों को उचित कानूनी प्रक्रिया से वंचित कर रहा है।








