प्रदेश में शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, इसके बावजूद ठिठुरन भरे इस मौसम में 6864 बच्चे बिना कुर्सी, मेज के पढ़ रहे हैं। इसके अलावा स्कूलों में अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव बना है।
शिक्षा विभाग की ओर से वैसे तो सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने के दावे किए जा रहे हैं। विभाग का कहना है कि 840 से अधिक स्कूलों में हाइब्रिड मोड में स्मार्ट क्लास और वर्चुअल क्लासरूम शुरू किए हैं। इन कक्षाओं में एनसीईआरटी, एससीईआरटी डिजिटल कंटेंट, एलईडी स्क्रीन, और इंटरनेट सुविधा के जरिये शिक्षा को रोचक बनाया जा रहा है। चार हजार से ज्यादा स्कूलों में संपर्क स्मार्ट शाला कार्यक्रम के तहत स्मार्ट टीवी और डिजिटल सामग्री प्रदान की जा रही है।









