Chandigarh Mayor: BJP के साैरभ जोशी बने चंडीगढ़ के नए मेयर, आप-कांग्रेस का टूटा गठबंधन

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भाजपा ने एक बार फिर चंडीगढ़ के मेयर पद पर कब्जा कर लिया है। सौरभ जोशी चंडीगढ़ के नए मेयर बन गए हैं। गुरुवार को निगम सदन में मेयर चुनाव हुआ। इस बार चुनाव हाथ उठाकर करवाया गया।

आप ने नहीं किया कांग्रेस का समर्थन

चुनाव प्रक्रिया प्रिजाइडिंग अफसर रमणीक बेदी ने शुरू करवाई। सबसे पहले कांग्रेस उम्मीदवार के लिए वोटिंग हुई। आप ने कांग्रेस का समर्थन नहीं किया तभी तय हो गया था कि भाजपा ही चुनाव जीतेगी। इसके बाद भाजपा उम्मीदवार के लिए हाथ उठवाए गए। जोशी को 18 वोट मिले। कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार की वोटिंग के बाद वाॅकआउट किया।

 

 

आप के बागी रामचंद्र ने पार्टी का साथ दिया

सबसे अंत में आप के उम्मीदवार योगेश ढींगरा के लिए मतदान हुआ। ढींगरा को 11 वोट मिले। पार्टी के लिए बगावती तेवर दिखाने वाले रामचंद्र यादव ने भी अपना वोट ढींगरा को ही दिया। इस बार मेयर चुनाव की वीडियोग्राफी भी करवाई गई ताकि धांधली की कोई गुजाइश न रहे।

सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद भी भाजपा जीती

इसके बाद हुए सीनियर डिप्टी मेयर के चुनाव में भाजपा के जसमनप्रीत सिंह जीत गए। डिप्टी मेयर चुनाव भी भाजपा की सुमन देवी जीत गई है। रामचंद्र यादव ने चुनाव से पहले अपना नाम वापस ले लिया।

जोशी बोले-जीत नहीं, जिम्मेदारी मिली

पद संभालने के बाद जोशी ने कहा कि एक पिता की तपस्या, एक बेटे का संकल्प। मैं वहां से आया हूं जहां राजनीति शोर नहीं थी, सेवा एक संस्कार थी। जहां मेरे पिता ने ज़िन्दगी अपने लिए नहीं, उनके लिए जी जिन्हें समाज अक्सर देखना भूल जाता था। मैंने उन्हें देखा है सुबह सबसे पहले किसी मज़दूर की पीड़ा सुनते हुए और रात सबसे आखिर में किसी ग़रीब की चिंता करते हुए। उनके लिए दलित, वंचित, मज़लूम सिर्फ शब्द नहीं थे, वे परिवार थे। घर में कभी आराम की बातें नहीं हुई, बस एक ही सीख मिली—अगर किसी की आंखों में आंसू हों तो राजनीति नहीं, इंसानियत पहले रखो।

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आज अगर मैं यहां खड़ा हूँ, तो ये मेरी उड़ान नहीं, उनकी ज़मीन से जुड़ी तपस्या का फल है। मेरे 14 साल आसान नहीं थे। नाम नहीं पुकारा गया, मंच नहीं मिला। कई बार लगा कि शायद इंतज़ार ही मेरी नियति में है। लेकिन हर बार पिता की आवाज भीतर से आती थी—बेटा, सही रास्ता देर से पहुंचाता है पर खाली हाथ नहीं लौटाता।

उन कठिन दिनों में मेरा परिवार मेरी ढाल बनकर खड़ा रहा। मेरे मित्र मेरी हिम्मत बने। मेरे वार्ड के बुजुर्गों ने मुझे दुआओं से थामा। युवाओं ने उम्मीद की मशाल जलाई। और हर निवासी ने मुझे बिना शर्त प्यार, विश्वास और ताकत दी। जब मैं थका, उन्होंने मुझे चलाया। जब मैं चुप हुआ, उन्होंने मेरी आवाज़ बनकर मेरा नाम लिया।

आज जब मैं यहां पहुंचा हूं, तो पूरे विनम्र भाव से कहता हूं—इस यात्रा का हर श्रेय उन सबको जाता है। आज इस सदन में मुझे सिर्फ समर्थन नहीं, आज इस सदन में मुझे सिर्फ समर्थन नहीं, अपने पिता की परछाई दिखती है। विपक्ष की आंखों में भी वही सम्मान, वही विश्वास नज़र आता है। मैं जानता हूँ ये सदन मतों से बंटा है, पर दर्द, संघर्ष और उम्मीद हम सबको एक ही भाषा सिखाती है। आज मैं आपसे प्रतिद्वंद्वी नहीं, एक सहयात्री की तरह बात कर रहा हूँ। क्योंकि कुर्सी एक होती है, पर शहर हम सबका होता है। मुझे पूरा भरोसा है कि आने वाले 300 दिनों में हम सब पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर चंडीगढ़ को संवेदना, ईमानदारी और न्याय का शहर बनाएंगे।

मैं वादा नहीं करता कि कभी थकूंगा नहीं, पर ये ज़रूर कहता हूँ, पिता की विरासत को कभी झुकने नहीं दूंगा। और आज इस सदन में खड़े होकर मैं कोई नारा नहीं दे रहा हूँ, मैं एक स्वीकृति कर रहा हूं, एक्सेप्ट कर रहा हूँ। अगर मेरे शब्दों में ज़रा सी भी सच्चाई है, तो वो मेरे पिता की सीख से आई है। अगर मेरे कदम आज भी ज़मीन से जुड़े हैं, तो मेरे वार्ड के लोगों की दुआओं का असर है।

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मैं उन बुजुर्गों को नमन करता हूं जिनकी आँखों में आज भी मेरे लिए आशीर्वाद है। मैं उन युवाओं को सलाम करता हूँ जिन्होंने मुश्किल समय में भी मेरा साथ नहीं छोड़ा। मैं अपने परिवार और मित्रों के आगे और पार्टी के आगे सर झुकाता हूं क्योंकि जब सब शांत थे, वे मेरी ताकत थे। आज अगर मैं यहां पहुंचा हूं तो पूरे विनम्र भाव से कहता हूं, इसमें मेरा कुछ भी नहीं, ये सब आपका विश्वास है, आपका धैर्य है, आपकी दुआएं हैं। और अगर मेरे पिता आज कहीं से ये दृश्य देख रहे होंगे, तो शायद उन्हें गर्व नहीं, सुकून मिल रहा होगा।

मैं वादा करता हूं ये कुर्सी कभी मेरे और जनता के बीच दीवार नहीं बनेगी। ये पद नहीं, ये ऋण है। ये जीत नहीं, ये ज़िम्मेदारी है। और ये ज़िम्मेदारी मैं आखिरी सांस तक जनता के साथ निभाऊंगा। आप लोगों का शुक्रिया।

जोशी ने कहा कि जिस तरह से सीनियर लीडरशिप ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे मौका दिया, मैं बूथ लेवल के बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि मैं 1989 में पहली बार बूथ पर बैठा था और आज सीनियर लीडरशिप ने मुझे इस पद तक पहुंचाया है।


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