हरिद्वार- घास लेने जंगल गया था वन गुर्जर, जंगली हाथी ने किया हमला, पटक-पटककर मार डाला
Spread the loveहरिद्वार वन विभाग की श्यामपुर रेंज के कांसवाली बीट क्षेत्र जंगली हाथी के हमले में एक वन गुर्जर की मौत हो गई। हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत…
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आतंकी हमले में बलिदान हुए हवलदार गजेंद्र सिंह गढि़या का मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सरयू-खीरगंगा के संगम पर उनकी अंत्येष्टि की गई। सैकड़ों की संख्या में क्षेत्रवासियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
मैदान से जवान की अंतिम यात्रा भारत माता की जय, बलिदानी गजेंद्र सिंह अमर रहें के गगनभेदी नारों के साथ श्मशानघाट के लिए रवाना हुई। सरयू-खीरगंगा के संगम पर सिख रेजीमेंट और सिग्नल कोर जवानों ने अंतिम सलामी दी। लिदानी के चचेरे भाई नवीन और छोटे भाई किशोर ने चिता को मुखाग्नि दी। वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखों में आंसू थे। इस मौके पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी विजय मनराल, एसडीएम अनिल चन्याल आदि रहे।

मां की सिसकियां और पत्नी को रोते देख जवानों का दिल भी रोया
वायुसेना के हेलीकॉप्टर से जैसे ही बलिदानी के पार्थिव शरीर का ताबूत बाहर निकाला गया, उनकी मां और पत्नी का सब्र टूट गया। लीला ने जैसे ही अपने पति का चेहरा देखा तो दहाड़े मारकर रोने लगीं। कभी वह अपने पति के चेहरे को छूतीं, कभी ताबूत से लिपटकर रोने लगतीं। वहां मौजूद विधायक और अन्य लोग उन्हें लगातार सांत्वना देते रहे। इस दौरान कई बार वह बेसुध भी हो गईं। यही हाल गजेंद्र की माता चंद्रा गढि़या का भी रहा। बेटे का चेहरा छूकर और ताबूत से लिपटकर वह खूब रोईं।
पिता धन सिंह ने किसी तरह अपने आंसुओं को रोके रखा था, लेकिन बेटे के अंतिम दर्शन के दौरान वह भी स्वयं पर काबू नहीं रख पाए। उनकी आंखों से आंसुओं की धार बहने लगी। परिजनों के करुण क्रंदन के बीच लोगों ने वीरता के नारे भी लगाए। यह पल गम और गर्व का अहसास कराने वाला रहा।
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