कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती पीड़ितों से मुलाकात की। इसके बाद वे भागीरथपुरा पहुंचे।उन्होंने संस्कार उद्यान में पीड़ित परिवारों को राहत राशि प्रदान की और सरकार के अर्बन मॉडल पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़ितों को दिया मदद का आश्वासन
भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण अपनी मां को खोने वाले मनीष पवार ने लोकसभा विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात के बाद कहा कि राहुल गांधी पीड़ितों की मदद करने, उन्हें दिलासा और सांत्वना देने आए थे। उन्होंने आर्थिक सहायता के रूप में एक लाख रुपये का चेक दिया। बीस परिवार मौजूद थे। राहुल गांधी ने उनसे कहा कि वे हमें स्वच्छ पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास करेंगे।
पानी पीने से मौतें, क्या यही है सरकार का अर्बन मॉडल-राहुल गांधी
भागीरथपुरा में पीड़ितों से मिलने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार अबर्न मॉडल की बात करती है लेकिन पानी पीने से मौतें हो रही है। क्या सरकार का अबर्न मॉडल यही है। राहुल ने कहा कि हमसे कहा जाता था कि देश को स्मार्ट शहर मिलेंगे,लेकिन यह कैसा स्मार्ट सिटी का मॉडल है, जहां पीने का साफ पानी नहीं मिलता।पानी पीने से लोगों की मौत हो जाती है ।लोगों को डराया जाता है। ये हालत सिर्फ इंदौर में ही नहीं देश के कई शहरों में है।लोगों को साफ पानी मिले, कम प्रदूषण रहे,यह सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन उसे नहीं निभाया जा रहा है।
पीड़ितों की मांग दोषियों को कड़ी सजा मिले

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सबसे पहले गीता बाई के परिवार से मुलाकात की। इसके बाद वे पैदल ही जीवनलाल के घर पहुंचे। वहां से वे सभी पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए संस्कार उद्यान में पहुंचे। रहवासियों ने राहुल गांधी को बताया कि अभी भी क्षेत्र में कई जगहों पर गंदा पानी आ रहा है। वे गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। जगह-जगह लोग राहुल गांधी को आवाज लगाकर उन्हें क्षेत्र की परेशानियां बताने की कोशिश करते रहे थे। संस्कार उद्यान में पीड़ित परिवारों ने बताया कि यहां पर लंबे समय से पीने का गंदा पानी आ रहा था। वे कई बार शिकायतें कर चुके थे लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। लोगों ने यह भी बताया कि अभी भी लगातार डायरिया के केस आ रहे हैं। एक दिन पहले ही साफ पानी घरों में आया है लेकिन अधिकारियों ने कहा है कि अभी भी उन्हें पानी उबालकर ही पीना पड़ेगा। परिजन ने बताया कि इस मामले के असली दोषियों को बचाया जा रहा है। जो देह त्याग गए, उन्हें तभी शांति मिलेगी, जब मामले में दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।









