मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को घोषणा की है कि सरकार ने स्कूलों में श्रीमद् भगवत गीता के श्लोक के पाठ को अनिवार्य किया है। इसका मकसद छात्रों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन दर्शन से जोड़ना है, जिससे उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में यह बात कही। वहीं, सीएम ने एक वीडियो पोस्ट में, अल्मोड़ा जिले में स्थित ऐतिहासिक कटारमल सूर्य मंदिर का जिक्र किया। भगवान सूर्यदेव को समर्पित यह मंदिर कत्यूरी काल की उत्कृष्ट वास्तुकला और गहरी भक्ति का प्रमाण है। सीएम धामी ने मंदिर के महत्व पर जोर देते हुए कहा, यह उत्तराखंड के गौरवशाली इतिहास और जीवंत सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है।
महाभारत भी कोर्स में होगा शामिल
शिक्षा विभाग ने नई शिक्षा नीति के तहत महाभारत को भी राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा में शामिल किया गया है। सरकार की ओर से इसकी मंजूरी मिल चुकी है। जिसके सरकारी और अशासकीय स्कूलों के बच्चे कोर्स में इसे पढ़ सकेंगे। राज्य पाठ्यचर्या की रूपरेखा के राज्य समन्वयक रवि दर्शन तोपाल के मुताबिक राज्य के स्कूलों में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू है। एनईपी के तहत इसमें 20 से 30 प्रतिशत बदलाव होना है। इसी के तहत रामायण और महाभारत के विभिन्न प्रसंग पाठ्यक्रम में शामिल किए जा सकते हैं।
राज्य आंदोलन का इतिहास भी पढ़ाएंगे
उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में प्रारंभिक कक्षाओं के बच्चे राज्य आंदोलन के इतिहास के साथ ही कारगिल के अमर शहीदों के बलिदान को पढ़ेंगे। सीएम की घोषणा के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने हमारी विरासत और विभूतियां पुस्तक तैयार की है, जिसे कक्षा छह से आठ तक सामाजिक विज्ञान विषय की सहायक पुस्तिका के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।








