जब दिल अपनी पूरी ताकत से धड़कना बंद कर देता है और दवाइयां, स्टेंट या सर्जरी भी काम नहीं करती हैं, ऐसे हालात में हार्ट ट्रांसप्लांट उम्मीद की एक नई धड़कन बनकर सामने आती है। इस प्रक्रिया में बीमार व्यक्ति के दिल को निकालकर, स्वस्थ दान किए गए दिल को लगाया जाता है, ताकि मरीज फिर से सामान्य जीवन जी सके।
देश के शीर्ष और चुनिंदा अस्पतालों में ही अब तक ये सुविधा उपलब्ध है। हालांकि देश में स्वास्थ्य क्षेत्र के इतिहास में पहली बार एक जिला-स्तरीय अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट होने जा रहा है।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि, देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के इतिहास में पहली बार जिला-स्तरीय अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में एक 46 साल के व्यक्ति का रोड एक्सीडेंट हुआ था। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अब उसका दिल किसी जरूरतमंद को लगाया जाएगा और ये प्रक्रिया पहल बार किसी जिला स्तरीय अस्पताल में होने जा रही है।
केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी
स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया, एक्सीडेंट के कारण ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार ने डोनेशन प्रक्रिया के जरिए अंग दान करने पर सहमति जताई है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, मैं इस फैसले के लिए परिवार को धन्यवाद देना चाहती हूं। अपने दुख में भी उन्होंने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। मैं परिवार के प्रति अपनी संवेदना और दुख व्यक्त करती हूं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में सर्जिकल प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीएम ने गृह विभाग को निर्देश दिए हैं और हेलीकॉप्टर के माध्यम से जल्द ही दान किए गए दिल को तिरुवनंतपुरम से एर्नाकुलम ले जाया जाएगा।
मरीज के परिवार ने दोनों किडनी और आंखें भी दान की है। परिजनों ने त्वचा का भी दान किया है। हमने तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में पहले से ही स्किन बैंक शुरू किया हुआ है, जहां पर दान किया गया स्किन रखा जाएगा। मेरे पास कोई शब्द नहीं है, मैं उस परिवार को बहुत धन्यवाद देती हूं क्योंकि इस फैसले से कई लोगों को नई जिंदगी मिल सकती है।
देश में पहली बार किसी जिला अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट किया जाने वाला है। सरकार ने इस तरह की व्यवस्था बनाने के लिए बहुत सहयोग किया है।







