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भारत में वाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य एप तमाम मैसेजिंग का माध्यम बन चुके हैं, लेकिन बढ़ती साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों के मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने मैसेजिंग एप्स से जुड़े नियम पूरी तरह बदल दिए हैं।
फोन से SIM निकाली तो बंद हो जाएगा एप
केंद्र सरकार के नए साइबर सुरक्षा नियमों के अनुसार अब कोई भी मैसेजिंग एप तब तक नहीं चलेगा, जब तक फोन में एक्टिव सिम कार्ड मौजूद न हो। यानी यदि कोई यूजर सिम निकाल देता है। तो एप काम करना तुरंत बंद कर देगा।
सरकार के अनुसार, अपराधी अक्सर असली सिम निकालकर इंटरनेट या वाई-फाई के जरिए फर्जी नंबरों, वीपीएन और नकली अकाउंट से साइबर ठगी करते हैं। नया नियम इसी को रोकने के लिए बनाया गया है।
किन एप्स पर लागू होगा नियम?
नई गाइडलाइन अधिकतर सभी मैसेजिंग एप्स के लिए लागू हो रहा है। जैसे की वाट्सएप, टेलीग्राम, स्नैपचैट, शेयरचैट, जीचैट, जोश और ऐसे सभी एप जिनमें मोबाइल नंबर से अकाउंट चलाया जाता है।
कंपनियों को क्या करना होगा?
दूरसंचार विभाग ने इस बदलाव को Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules 2025 के तहत अनिवार्य कर दिया। कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि यूजर का अकाउंट उसी समय चले जब सिम एक्टिव व मोबाइल में मौजूद हो। बैकग्राउंड में बिना सिम के एप चलने पर ऑटो लॉगआउट हो जाए।
WhatsApp Web के लिए भी बदलाव
यह नियम सिर्फ मोबाइल एप के लिए नहीं बल्कि वाट्सएप वेब पर भी लागू होता है। अब वाट्सएप वेब सिर्फ हर छह घंटे के बाद खुद ब खुद लॉगआउट हो जाएगा। इसके बाद यूजर को दोबारा मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करके लॉगइन करना पड़ेगा। सरकार ने मैसेजिंग एप कंपनियों को 90 दिन के भीतर नए सिस्टम को लागू करने का आदेश दे दिया है।
अभी तक मैसेजिंग एप इंस्टॉल करते समय केवल एक बार मोबाइल नंबर की ओटीपी से वेरिफिकेशन जरूरी होता था। उसके बाद, SIM कार्ड मोबाइल से निकालने पर भी एप चलता रहता था। साइबर ठग इसी लूपहोल का फायदा उठाते थे।