इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम (IIGF-2025) का पांचवां संस्करण शुक्रवार को खत्म हो गया। दो दिनों तक चले इस बड़े डिजिटल सम्मेलन का आयोजन दिल्ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुआ। इसमें केंद्र सरकार, बड़ी टेक कंपनियों, विश्वविद्यालयों, नागरिक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। यह सभी एक्सपर्ट एक ही लक्ष्य के साथ जुटे। भारत के लिए एक खुला, भरोसेमंद और सबको जोड़ने वाला इंटरनेट इकोसिस्टम कैसे बनाया जाए?
IIGF क्या है?
IIGF यानी इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम संयुक्त राष्ट्र इंटरनेट गवर्नेंस फोरम का भारतीय संस्करण है। जिसे 2021 में स्थापित किया गया था। इसमें सरकार, उद्योग, सिविल सोसाइटी, तकनीकी समुदाय और अकादमिक संस्थान बराबरी से शामिल होते हैं। 14 सदस्यीय समिति इस फोरम की दिशा तय करती है। IIGF-2025 का आयोजन 27 से 28 नवंबर को नई दिल्ली में हुआ।
इस वर्ष इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम का थीम
इस वर्ष का थीम- ‘एडवांसिंग इंटरनेट गवर्नेंस फॉर एन इनक्लूसिव एंड सस्टेनेबल विकसित भारत’ था। इसके तहत तीन मुख्य मुद्दों- इनक्लूसिव डिजिटल फ्यूचर, सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई फॉर पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस पर चर्चा हुई। इन विषयों पर पैनल और वर्कशॉप में ग्रामीण इंटरनेट कनेक्टिविटी, ओपन डिजिटल सिस्टम, DNS सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी, डाटा प्रोटेक्शन, कंटेंट मॉडरेशन और एआई के सुरक्षित उपयोग जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात हुई। इस कार्यक्रम में 4 पैनल डिस्कशन और 12 वर्कशॉप आयोजित की गई।
वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी
संयुक्त राष्ट्र इंटरनेट गवर्नेंस फोरम, मेटा, गूगल क्लाउड और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भारत के डिजिटल मॉडल को ग्लोबल संदर्भ में रखा और बताया कि भारत की डिजिटल यात्रा दुनिया के लिए क्यों प्रेरणादायक है। उद्घाटन सत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री जितिन प्रसादा ने कहा “डिजिटल दुनिया तभी आगे बढ़ सकती है, जब सभी मिलकर काम करें। हमारा लक्ष्य हर नागरिक को सुरक्षित, सुलभ और किफायती इंटरनेट देना है”। इसके अलावा उन्होंने कहा- “साइबर खतरों से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए उद्योग, अकादमिक संस्थान और समाज सभी को आगे आना होगा”। उन्होंने 5G कवरेज, डिजिटल पब्लिक सिस्टम और डाटा प्रोटेक्शन एक्ट को भारत की डिजिटल मजबूती की बड़ी उपलब्धियां बताई।
MeitY के संयुक्त सचिव सुशील पाल ने कहा कि- “IIGF भारत की डिजिटल उपलब्धियों और एआई युग की चुनौतियों दोनों को सामने लाता है। इंडिया स्टैक का पैमाना ग्लोबल मॉडल बन चुका है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी है। साइबर हमले, गलत सूचना और तकनीक के दुरुपयोग से बचने के लिए ट्रस्ट और सेफ्टी को मजबूत करना जरूरी है”।
NIXI के सीईओ देवेश त्यागी ने कहा कि- “IIGF की असली ताकत यह है कि यह कई हितधारकों को एक साथ लाता है, यह मंच इनफॉर्म्ड और इंक्लूसिव निर्णय लेने का मजबूत आधार देता है। इंटरनेट, डोमेन नेम और इंटरनेट प्रोटोकॉल पर बने स्पेशल इंटरेस्ट ग्रुप्स ने विशेषज्ञता को और बेहतर किया है। NIXI इंटरनेट इंटर्न स्कीम से पिछले एक साल में 10,000 से ज्यादा छात्र जुड़े हैं”।
क्या निकला फोरम में चर्चा का निष्कर्ष?
दो दिनों की चर्चा के बाद इंडिया इंटरनेट गवर्नेंस फोरम से जो मुख्य निष्कर्ष निकल कर आया वो ये रहा है कि- सभी के लिए सस्ता और सार्थक इंटरनेट एक्सेस जरूरी है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाना होगा। भरोसेमंद तकनीकी मानकों और साइबर सुरक्षा पर निरंतर काम करने की जरूरत है। सम्मेलन इस प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुआ कि भारत और विश्व के लिए एक सुरक्षित और समावेशी इंटरनेट का निर्माण किया जाएगा।









