चमोली जनपद में यूं तो कई मेले आयोजित हाेते हैं, मगर अनसूया मेले का लोगों को वर्ष भर इंतजार रहता है। चमोली के इस प्रसिद्ध मेले में राज्य से ही नहीं बल्कि देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि अनसूया मंदिर में दर्शन पूजन से श्रद्धालुओं की संतान कामना पूरी होती है।
प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती पर संतान दायिनी सती शिरोमणि अनसूया मंदिर में दो दिवसीय मेले का आयोजन होता है। इस वर्ष तीन और चार दिसंबर को होने वाले इस मेले की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मेले के पहले दिन दोपहर बाद बणद्वारा, देवलधार, कठूड़ और सगर गांव की ज्वाला देवी की डोली तथा मंडल व खल्ला गांव से मां अनसूया की डोली ढोल-दमाऊं की थाप पर सैकड़ों भक्तों के साथ अनसूया मंदिर पहुंचती है। पांच किलोमीटर की पैदल दूरी तय करने के बाद देव डोलियों का मंदिर परिसर में अद्भुत मिलन होता है।







