श्री महंत कमल नयन दास महाराज के साथ महंत विजय दास ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
दिल्ली के निगमबोध घाट पर शुक्रवार को संत समाज की महान विभूति श्रीरामकृष्ण महात्यागी जी महाराज का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। अंतिम संस्कार के दौरान वातावरण संतों के भजनों और श्रद्धांजलि स्वरूप गूंजते श्लोकों से भावविह्वल हो उठा।
अयोध्या की प्रतिष्ठित पीठों से जुड़े संतों ने इस अवसर पर भारी संख्या में पहुँचकर उन्हें अंतिम विदाई दी। विशेष रूप से मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास महाराज और कंचन भवन के पीठाधीश्वर महंत विजय दास महाराज ने नम आँखों से अपने श्रद्धेय संत को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
महंत कमल नयन दास जी ने कहा…
“महात्यागी जी का संपूर्ण जीवन सनातन धर्म और समाज की सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने अपने तप, त्याग और साधना से संत परंपरा को नई ऊँचाई दी। वे हम सबके प्रेरणास्त्रोत रहे हैं और रहेंगे। उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

महंत विजय दास जी हुए भावुक…
महंत विजय दास महाराज ने भावुक होकर कहा—
“महात्यागी जी का मार्गदर्शन हमें निरंतर मिलता रहा। उनका जीवन धर्म, तप, दया और दान का जीता-जागता उदाहरण था। उनका जाना संत समाज ही नहीं, पूरे आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। वे हमारे हृदय में सदैव विद्यमान रहेंगे।”
संत समाज में शोक की लहर
महंत कमल नयन दास और महंत विजय दास के साथ अनेक संतों ने निगमबोध घाट पहुँचकर महात्यागी जी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भी मौजूद रही। सभी ने एक स्वर में कहा कि महात्यागी जी के विचार और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को धर्ममार्ग पर चलने की प्रेरणा देते रहेंगे।
निगमबोध घाट का वातावरण उस समय भावुक हो उठा जब संतों ने गंगा जल और पुष्प अर्पित कर महात्यागी जी के चरणों में अंतिम प्रणाम किया।







