Bank Fraud: मास्टरमाइंड बैंक मैनेजर समेत 4 गिरफ्तार, उच्च स्तरीय समिति कर रही है मामले की गहन जांच

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ईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के विभिन्न खातों में 583 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मंगलवार रात मास्टरमाइंड एयू स्मॉल बैंक की जीरकपुर शाखा के मैनेजर रिभव ऋषि समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एसआईटी प्रमुख डीएसपी शुक्रपाल ने आरोपियों को गिरफ्तार करने की पुष्टि की। चारों आरोपियों का देर रात पंचकूला सिविल अस्पताल में मेडिकल कराया गया।

 

एसीबी ने पंचकूला के सेक्टर 20 निवासी रिभव ऋषि के अलावा उसके दोस्त अभय कुमार, चंडीगढ़ निवासी फर्म के निदेशक अभिषेक सिंगला और स्वाति सिंगला को गिरफ्तार किया है। सूत्रों के अनुसार एसीबी को पहले दिन से इन आरोपियों पर संदेह हो गया था। इसके बाद एसीबी की टीम लगातार मोहाली, जीरकपुर सहित अन्य ठिकानों पर छापे डालकर साक्ष्य जुटाने में लगी थी। चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम हरियाणा सरकार के सरकारी विभागों में तैनात इनके सहयोगियों का पता लगा रही है।

दोस्त के साथ मिलकर बनाई धोखाधड़ी की योजना
रिभव ऋषि पहले चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शाखा में बतौर मैनेजर कार्यरत था। इसके बाद वह एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में मैनेजर बन गया। सूत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार के कुछ अधिकारियों से उसकी अच्छी जान-पहचान थी। उसने खरड़ निवासी अपने दोस्त अभय कुमार के साथ मिलकर सरकारी पैसे को गबन करने की योजना बनाई।

दीदी-जीजा को शामिल किया, बोगस फर्म में पैसे ट्रांसफर किए
खरड़ निवासी अभय भी बैंक कर्मचारी रहा है। धोखाधड़ी की योजना में अभय की दीदी स्वाति सिंगला और उनके पति अभिषेक सिंगला को भी शामिल कर लिया। अभय व स्वाति के नाम पर स्वस्तिक देश प्रोजेक्ट नामक की बोगस फर्म बनाई गई। आरोपियों ने इसी फर्म के जरिए हरियाणा सरकार के खातों से राशि ट्रांसफर करके गबन शुरू कर दिया।

जल्द अमीर बनने की चाहत…हर्षद मेहता को मानते आदर्श 
सूत्रों के मुताबिक एसीबी की पूछताछ में सामने आया कि रिभव और अभय जल्दी बड़ी रकम कमाने के लिए काफी समय से अलग-अलग बैंकों में नौकरी करते थे। दोनोंकी दोस्ती भी इसी चक्कर में हुई थी। दोनों आरोपी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बिग बुल हर्षद मेहता को अपना आदर्श मानते हैं।

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विधानसभा में सीएम ने कहा-पूरे पैसे सरकार के पास वापस आए
मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में जानकारी दी कि धोखाधड़ी का पता चलने के 24 घंटे के भीतर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने राज्य सरकार की पूरी राशि ब्याज समेत लौटा दी है। बैंक की ओर से 556 करोड़ 15 लाख 29 हजार रुपये की राशि सरकारी खातों में जमा कर दी गई है। इसमें 22 करोड़ रुपये ब्याज भी शामिल है। उन्होंने सदन को बताया, वित्त सचिव अरुण गुप्ता के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित कर दी है जो जांच करेगी कि यह किसकी गलती से हुआ है। भविष्य में दोबारा ऐसा न हो इसके लिए भी समिति सुझाव देगी। हालांकि बैंक की ओर से जारी बयान में 583 करोड़ रुपये लौटाने की बात कही गई है।

कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी जांच समिति
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि बैंक की ओर से बताया गया है कि यह प्रकरण मुख्य रूप से चंडीगढ़ की शाखा का था और यह मध्यम व निम्न वर्गीय कर्मचारियों की मिलीभगत से हुआ। सैनी ने स्पष्ट किया कि सरकार बैंक के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करेगी कि इस प्रकरण में शामिल कोई भी व्यक्ति चाहे वह सरकारी अधिकारी हो या बैंक कर्मचारी बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई उच्चस्तरीय समिति कर्मचारियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, हरियाणा सरकार की कार्यप्रणाली पूरी तरह से बदल चुकी है। पहले घोटालों की फाइल को ही दबा दिया जाता था। मेरे पास ऐसी कई फाइलें हैं। सीएम के इस बयान पर कांग्रेस विधायकों ने हंगामा भी किया।

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