खकनार जनपद पंचायत में ग्रामीण क्षेत्रों की छोटी पंचायतों में वर्ष 2015-16 में पंच परमेश्वर योजना के अंतर्गत सोलर स्ट्रीट लाइट के लिए पंचायतों में राशि स्वीकृत हुई थी।,
इस राशि में लगभग ₹ दस हजार की कीमत वाले सोलर स्ट्रीट लाइट पंचायतों में लगना था, सोलर लाइट लगाने का उद्देश्य यह था कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या और भारी बिजली बिल से निजात पाना।
पंचायतों में आबादी अनुसार राशि डाली गई राशि डलने के पंद्रह दिन में ही खातों से राशि का आहरण कर लिया गया था – ग्राम पंचायत बालापाठ में तीन गांव आते हैं एक गांव में पांच स्ट्रीट लाइट, तीन गावो में पंद्रह की स्वीकृति के लिए एक लाख पचास हजार छः सौ की राशि स्वीकृत हुई थी गांव में आज तक भी सोलर स्ट्रीट लाइट नहीं लगाए गए।
ग्राम पंचायत रामाखेड़ा कला में बारह लाइट के लिए ₹ एक लाख अट्ठाइस हजार एक सौ की राशि स्वीकृत हुई थी गांव में एक भी लाइट नहीं लगाया।
रामाखेड़ा खुर्द में एक लाख पांच हजार छः सो रुपए से दस लाइट लगना थे जिसमें सिर्फ सात खंबे गांव में लगे हुए हैं।
ग्राम पंचायत दाहिदा में दस लाइट लगाने के लिए ₹ एक लाख पांच हजार छः सौ की राशि स्वीकृत हुई थी गांव में आज तक लाइट नहीं लगे।
ग्राम पंचायत शेखपुरा ₹ एक लाख पांच हजार छः सौ की स्वीकृत राशि में सिर्फ चार लाइट ही लगे हैं वह भी बंद पड़े हुए हैं।
ग्राम पंचायत सजनी ₹ एक लाख पांच हजार छः सौ की राशि स्वीकृत एक लाइट भी नहीं लगा।
ग्राम पंचायत दैय्यत रैय्यत में ₹ एक लाख पांच हजार छः सौ की राशि स्वीकृत हुई थी पांच खंबे खड़े किये थे उनमें सोलर प्लेट और लाइट नहीं लगाये।
तत्कालीन सचिव ने नाम नहीं बताने की शर्त पर जानकारी दी है कि वर्ष 2015-16 में जो राशि स्वीकृत हुई थी उसमे दस साल की ग्यारंटी वाले सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए थी, स्वीकृत राशि पंचायतों के खाते में आने पर दबाव बनाकर तत्कालीन जनपद सीईओ के साथ जिले के भाजपा नेताओ ने अपने साथ लाये लैपटॉप की मदद से पूरी राशि स्वामी विवेकानंद सेल्स एंड सर्विस के खाते में जमा किए थे। कई बार उनसे कहा कि लाइट लगवा दो या राशि वापस करो लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई इस मामले की कई शिकायतें भी की हैं लेकिन राजनीतिक दबाव में फाइले दबी पड़ी हैं अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं।









