देहरादून : सीपीआई(एम)ने लगाया भाजपा पर वैक्सीनेशन का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप।मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी)राज्य कमेटी के जनप्रतिनिधि मण्डल ने आज जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से मुख्यमंत्री को राज्य के सभी जिलों और केंद्रों में वैक्सीनेशन सुचारू रूप से जारी रखने के लिए ज्ञापन प्रेषित किया।

गुरुवार को माकपा के नेताओं ने पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड राजेन्द्र सिंह नेगी के नेतृत्व में देहरादून जिला मुख्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम प्रेषित ज्ञापन में राज्यभर में सभी वैक्सीन केन्द्रों में निशुल्क कोरना रोकथाम टीका उपलब्ध कराने तथा टीका केन्द्रों की संख्या बढाने की मांग की है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमण्डल का ज्ञापन को जिलाधिकारी के प्रतिनिधि के तौर पर उपजिलाधिकारी प्रेंम भारती ने लिया तथा आवश्यक कार्यवाही करने का आश्वासन भी दिया।

गुरुवार को पूर्व तय कार्यक्रम के अनुसार पूर्वाहन 11:30 बजे पार्टी कार्यकर्ता राज्य सचिव कामरेड राजेन्द्रसिंह नेगी के नेतृत्व में जिला मुख्यालय में एकत्रित हुऐ तथा एक स्वर से टीकाकरण में हो रही मनमानी पर रोक लगाने की मांग की तथा मांग की कि सभी को निशुल्क टीका दिया जाऐ ।

जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर माकपा प्रतिनिधि मंडल के वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कोरोना वैक्सीन टीके के व्यवसायीकरण तथा राजनीतिकरण पर अविलंब रोक लगायी जाये ।

जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड को प्रेषित ज्ञापन में सभी टीका केन्द्रों पर निशुल्क टीका तथा टीका केन्द्रों की संख्या बढाने, टीका केवल स्वास्थ्य विभाग या उनके द्वारा अधिकृत लोगों द्वारा ही लगाया जाने, नीजि अस्पतालों द्वारा टीके की आड़ में आमजनता से अवैध पैसा वसूली पर रोक लगाने की भी मांग की।

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माकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि सरकारी केन्द्रों पर टीका न होने से अधिकांश केन्द्र बन्द हैं जबकि भाजपा के बैनर तले हर दिन टीके लग रहे हैं जो कि राजनीतिक लाभ के लिए मिलीभगति का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि ऐसे कोरोनाकाल के संकट भरे दौर में सत्ताधारी भाजपा वैक्सीनेशन और कोरोना की दवाइयों की कालाबाजारी रोकने में असफल हो गई है।कोरोना से संक्रमित मरीजों को समुचित स्वास्थ्य उपचार,दवाइयां, ऑक्सीजन प्रयाप्त तौर पर नहीं मिल पा रहे हैं।

जबकि दूसरी तरफ राज्य के ग्रामीण इलाकों के मजदूरों की स्थिति लॉकडाउन के कारण खस्ताहाल बन गए हैं।कहा कि राज्य में पिछले दो-ढाई महीने से मनरेगा कर्मचारियों की हड़ताल से मनरेगा मजदूरों की आर्थिक स्थिति ओर ग्राम पंचायतों के विकास कार्य ठप्प पड़ गए हैं परंतु सरकार मनरेगा कर्मचारियों और मनरेगा मजदूरों सहित ग्राम पंचायतों के विकास के हित में त्वरित निर्णय लेने में आंखें बंद कर रखी हैं।जो कि इस कोरोनकाल में कहीं से भी न्यायोचित नहीं कहा जा सकता है।कहा कि सरकार को मनरेगा कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र अमल करना चाहिए जिससे कि इस आपदाकाल में भी मनरेगा मजदूरों को परेशानी न उठानी पड़े।
इस अवसर पर सीपीएम की ओर से सुरेंद्र सिंह सजवाण,राजेन्द्र पुरोहित,शिवप्रसाद देवली, कमरूद्दीन,लेखराज,अनन्त आकाश,नितिन मलेठा,भगवन्त पयाल,सतीश धौलाखण्डी व कमलेश खन्तवाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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