उत्तराखंड/चमोली : स्थापना के बाद से ही अपने सुरक्षित भवन का इंतजार कर रही तहसील नारायणबगड़।काम चालाऊ तहसील परिसर पर मंडरा रहा पिण्डर नदी का खतरा।

एंकर….क्षेत्र के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पर थराली तहसील से पृथक होकर सन् 2015 में स्थापित तहसील नारायणबगड़ को आज भी अपने एक सुरक्षित भवन का इंतजार है।राजनीतिक फायदों के लिए नयी तहसील की घोषणा तो कर दी गई और उसकी काम चलाऊ स्थापना भी कर दी गई।परंतु किसी ने ऐसा नहीं सोचा कि इसके लिए एक सुरक्षित भवन भी चाहिए।हम सुरक्षित भवन की बात इसलिए कर रहे हैं कि अभी वर्तमान में जिस स्थान पर तहसील कार्यालय संचालित किया जा रहा है, उस स्थान को कोई भी सुरक्षित नहीं कह सकते.हैंँ।यह स्थान हर समय खतरे में है।
बताते चलें कि यह स्थान पिण्डर नदी से बिल्कुल बमुश्किल आठ से नौ मीटर की दूरी पर है।यहां पर एक जमाने में कानूनगो चोकी बनाई गई थी।जिसमें आज नारायणबगड़ की तहसील संचालित की जा रही है।और इस भवन के तीन मीटर पीछे पूर्व मे बाल विकास विभाग का कार्यालय था।जो सन्2013 की आपदा की भेंट चढ़ गया था।अब पिछले बृहस्पतिवार से लगातार हो रही बारिश से पिण्डर नदी का जल स्तर सन् 2013 की भयंकर जल प्रलय की याद ताजा कर रहा है।तो तहसील के कर्मचारियों को चिंता सताना स्वावाभिक भी है।
अस्थाई तहसील परिसर के पीछे से पिण्डर नदी का कटाव जारी है।और कभी भी यह कानूनगो चोकी भवन नदी मे समा सकता है।जिस वजह से बारिश के दौरान तहसील के कर्मचारी डर के माहौल में काम करते हैं।
इस तहसील की स्थापना के बाद 11 जनवरी सन् 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उद्घाटन किया था।इसके बाद इसके भवन परिसर के लिए भूमि की तलाश शुरू की गई और पंती में उद्यान विभाग की खाली पड़ी जमीन का चयन कर लिया गया।तहसील प्रशासन ने जिलाधिकारी चमोली को उद्यान विभाग की जमीन का प्रस्ताव बनाकर भेजा।
तहसील प्रशासन के प्रस्ताव पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने भू वैज्ञानिकों को 2020 में जमीन का भूगर्भीय सर्वक्षण करने के आदेश भी दिए थे परंतु भू वैज्ञानिकों ने क्यों जिलाधिकारी के आदेश को ठेंगा दिखा दिया यह तो वे ही जानें।परंतु भू वैज्ञानिकों के कार्यालय की तरफ से बहुत बड़ी लापरवाह और जिलाधिकारी के आदेशों को ताक पर रखने जैसी बात है।

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