उत्तराखंड/चमोली : झलताल-सुपताल को पर्यटन के लिए विकसित करें सरकार–स्थानीय।

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उत्तराखंड में स्थित विश्व विख्यात चार धामों,पंच बद्री और पंच केदारों सहित तमाम हिमालयी यात्राओं को उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ माना जाता है। परंतु यदि उत्तराखंड में तमाम बेहतरीन और खूबसूरत पर्यटक स्थलों को चिन्हित कर उन्हें विकसित किया जाए तो तो यहां के लोगों के साथ साथ सरकार के राजस्व में भी अपार वृद्धि होने की संभावनाएं मजबूत होती हैं। परंतु आज भी उत्तराखंड के कई ऐसे पर्यटक स्थल हैं जो आज भी अपने विकास का टकटकी लगाकर इंतजार कर रहे हैं।

हम आज ग्राउंड जीरो से अपने प्राइम टीवी न्यूज के दर्शकों को एक ऐसे ही बहुत ही खूबसूरत स्थान से परिचित करा रहे हैं जो अपने आप में पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है।यह बहुत ही रमणीक और रोमांचकारी स्थान है चमोली जिले के तीन विकास खंडों नारायणबगड़, थराली और घाट के मध्य में समुद्र तल से लगभग दो हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित झलताल एवं सुपताल। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर तीनों विकास खंडों के मध्य में बसा इस क्षेत्र में वैसे तो साल भर स्थानीय लोगों का आना-जाना लगा ही रहता है। सैकड़ों कीलोमीटर में फैले इस रमणीक क्षेत्र में तीनों ही विकास खंडों की तरफ से यहां पहुंचा जा सकता है।यह ट्रैक बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी,बेदनी बुग्याल,रूपकुंड और पिण्डारी ग्लेशियर जैसे विख्यात पर्यटन व धार्मिक स्थलों के साथ जुड़ा हुआ है।

यहां पर स्थित झलताल में इतनी ऊंचाई पर गहरा पानी लोगों के आश्चर्य का कारण है। यहां बताया जाता है कि इस ताल में पक्षियां एक तिनका भी नहीं गिरने देते हैं।और सचमुच हमने भी ग्राउंड जीरो पर देखा कि घने जंगल के बीचों-बीच इस ताल में बहुत ही स्वच्छता कायम थी।आपको बताते चलें कि यहां पर हर वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महोत्सव भी बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। जिसमें तीनों विकासखंडों से हजारों लोग यहां आते हैं।

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जब हमने यहां के लोगों से बातचीत की तो लोगों ने कहा कि यदि सरकार यहां तक पहुंचने के लिए सड़क मार्गों का निर्माण करें तो यहां पर्यटन से रोजगार भी बढ़ेगा।पहाड़ों से लगातार रोजगार के लिए हो रहे पलायन से आज गांव के गांव खाली होते जा रहे हैं अगर सरकारें उत्तराखंड के तमाम ऐसे ही प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थलों को पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित करें तो इन क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को रोजगार की संभावनाएं भी पैदा करती हैं। यहां पहुंच कर तमाम सारे नजारे सैलानी अपनी आंखों से निहार सकते हैं यहां के घने घने जंगल, तमाम प्रजाति की वनस्पतियां, बड़े-बड़े देवदार, बांज बुरांस और विभिन्न प्रजाति के ऊंचे ऊंचे वृक्षों से लकदक बहुत बड़ा भूभाग को निहारते निहारते मन करता है कि हमेशा हमेशा के लिए यही बसा जाए। आपको बताते चलें की थराली विकासखंड के सोल डूंगरी से विकासखंड घाट तक मोटर मार्ग की मांग यहां के लोगों की दशकों पुरानी मांग है और सरकार ने इसे प्रस्तावित भी किया है। यहां के लोगों ने बताया की सड़क मार्ग वन अधिनियम की वजह से अभी अधर मैं लटकी हुई है।


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