शिकारियों और तस्करो के निशाने पर पेंगोलिन से लेकर तेंदुए तक

Spread the love

हल्द्वानी। सरकारों की तमाम कवायदों के बाद भी संकटग्रस्त वन्यजीवों की श्रेणी में आने वाले वन्यजीव तेंदुए से लेकर पेंगोलिन तक सुरक्षित नहीं हैं। इनका शिकार और अंगों की तस्करी के मामले गाहे-बगाहे सामने आते रहे हैं। बेहद मुश्किल से दिखाई देने वाले पेंगोलिन की तस्करी से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। इस साल बाघ की एक खाल भी चंपावत के चल्थी में बरामद हो चुकी है। वन्यजीवों विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीवों के वास स्थल प्रभावित हुए हैं, इससे भी समस्या बढ़ी है। हर साल मई के तीसरे शुक्रवार को लुप्तप्राय: प्रजाति दिवस (एंडेजर्ड स्पेसीज डे) मनाया जाता है, इसके बावजूद संकटग्रस्त जीवों का संकट कम होता नजर नहीं आता।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार संकटग्रस्त श्रेणी में आने वाले बाघ, तेंदुआ, पेंगोलिन, भालू आदि के अंगों का इस्तेमाल चीन में बनने वाली यौनवर्द्धक दवाओं में होता है। इसके साथ ही बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ की खाल की भी खासी मांग होती है। इन चीजों के लिए मुंहमांगी कीमत मिलती है, इसके लिए शिकारी मौके की तलाश में रहते हैं। पूर्व अवैतनिक वन्यजीव प्रतिपालक व वन्यजीव विशेषज्ञ दिनेश पांडे कहते हैं कि उत्तराखंड में बावरिया गिरोह कई घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं। इस काम में उनको कुछ स्थानीय लोगों का भी सहयोग रहता है।

हल्द्वानी। वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करने वाली डब्ल्यूपीएसआई के प्रोजेक्ट मैनेजर जोजफ टीटो कहते हैं कि तेंदुआ शेड्यूल-1 का वन्यजीव है। वर्ष-2020 में उत्तराखंड में 21 तेंदुओं की मौत हुई। इसमें 11 की खाल बरामद हुई हुई थी, जबकि 10 अन्य वजहों से मारे गए। इस साल ही 30 मामले आ चुके हैं। इसमें नौ मामलों में खाल बरामद हुई है। 21 की मौत अन्य वजहों से हुई। अगर बात बाघ की करें, तो पिछले साल नौ बाघ मरे थे, पर बाघ के शिकार का कोई मामला सामने नहीं आया था। इस साल चंपावत जिले के चल्थी में एसटीएफ और वन विभाग की टीम ने एक बाघ की खाल बरामद की है। इस साल सात बाघ मर चुके हैं। वहीं, अप्राकृतिक तौर पर कई हाथी मरे हैं। वर्ष-2019 में जसपुर क्षेत्र, वर्ष-2020 हल्दूचौड़ और इस साल रामनगर के गौजानी में करंट लगने से हाथी की मौत के मामले आ चुके हैं। इस साल हाथी दांत तस्करी के मामले में तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टीम ने आठ लोगों को पकड़ा था।
पेंगोलिन का भी तस्करी बढ़ी, कई तस्कर चढ़े हत्थे
हल्द्वानी। संकटग्रस्त पेंगोलिन की तस्करी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पेंगोलिन के शल्क का पाउडर बनाकर यौनवर्द्धक दवाओं में इस्तेमाल होता है, ऐसे में इसका शिकार भी खूब होता है। हल्द्वानी में 13 अप्रैल को पुलिस और वन विभाग की टीम ने एक जिंदा पेंगोलिन के साथ छह तस्करों को पकड़ा। पिछले रामनगर में वन विभाग की टीम ने दो तस्कर पकड़े थे। इसी साल बरहैनी रेंज की टीम ने पिछले साल पेंगोलिन का शल्क बरामद किया था, तस्कर वन विभाग की टीम को देखकर भाग खड़े हुए थे। वर्ष- 2019 में रुद्रपुर में एसटीएफ और वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने पेंगोलिन तस्करी के मामले में तीन लोगों को पकड़ा था। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यूपी-उत्तराखंड, नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्र संवेदनशील रहे हैं।

और पढ़े  देहरादून- सरकार के 4 साल बेमिसाल कार्यक्रम का CM धामी ने किया शुभारंभ, स्टॉल पर पहुंच बनाई सेल रोटी

Spread the love
  • Related Posts

    ऋषिकेश AIIMS: युवाओं में भी बढ़ रहा बड़ी आंत का कैंसर, बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान से चपेट में आ रहे

    Spread the love

    Spread the love   बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण अब युवाओं में भी बड़ी आंत का कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। सामान्यत: बड़ी…


    Spread the love

    चमोली: खेतों से चारा ला रही महिला पर घात लगाए बैठे भालू ने किया हमला, सिर, गर्दन और मुहं नोंच डाला

    Spread the love

    Spread the love   तहसील के बूंगा गांव में भालू ने घात लगाकर एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया है। युवती गोविंदी ( 26) अपने मायके आई हुई थी…


    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *