प्रधानमंत्री मोदी ने मन की बात में किया उत्तराखंड के सच्चिदानंद भारती का जिक्र, पढ़िए कैसे किया जल-जंगल का संरक्षण ।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात कार्यक्रम के दौरान जल और जंगल संरक्षण पर भी अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान पीएम मोदी ने उत्तराखंड के पौड़ी जिले के पर्यावरणविद् और सेवानिवृत्त शिक्षक सच्चिदानंद भारती का जिक्र किया और उनके द्वारा जंगल संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की सराहना की।

सच्चिदानंद भारती को जल और जंगल के संरक्षण के लिए जाना जाता है। गढ़वाल में जल और जंगल के संरक्षण के लिए काम कर रहे पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती का कहना है कि जल, जंगल और जमीन के साथ प्रकृति हमारे जीवन का आधार है।

केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि समस्त जीव सृष्टि इस पर निर्भर है। सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, जिसमें हम जीवन श्रृखंला कहते हैं। यदि इसमें एक भी कड़ी टूटती है तो समूचा जीवन प्रबंध बुरी तरह प्रभावित होता है। हम सभी लोग प्रकृति के ही अंग हैं। इसलिए हमारी प्रकृति के प्रति कुछ जिम्मेदारियां भी हैं। हमें अपनी जीवन पद्धति को प्रकृति के अनुरूप ढालना ही होगा।

बता दें कि बीरोंखाल ब्लाक (जिला पौड़ी गढ़वाल) के गाडखर्क गांव के मूल निवासी सच्चिदानंद भारती पिछले चार दशक से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उनका पाणी राखो आंदोलन विश्व प्रसिद्ध है।पिछले कई सालों से कोटद्वार के भाबर स्थित घमंडपुर गांव में निवास कर रहे सच्चिदानंद भारती इंटर कालेज उफ्रैंखाल से सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जिनकी पर्यावरण के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हैं। भारती का कहना है कि पानी का बाजारीकरण भविष्य का बड़ा संकट है। पानी पर सबका समान अधिकार रहे, इसके लिए आंदोलन की जरूरत है। सच्चिदानंद भारती ने वर्ष 1989 में बीरोंखाल के उफ्रैंखाल में इस काम को शुरू किया। इसके तहत उन्होंने छोटे-छोटे चाल खाल बनाए। जिनमें बरसात के पानी का संरक्षण किया।
उन्होंने क्षेत्र में करीब 30 हजार से अधिक चाल-खाल बनाए। जिन्हें उन्होंने ‘जल तलैया’ नाम दिया। उसके आसपास बांज, बुरांस और उत्तीस के पेड़ों को लगाया। परिणाम यह हुआ कि 10 साल बाद सूखा गदेरा सदानीर नदी में बदल गया। जिसे उन्होंने ‘गाड गंगा’ नाम दिया। गदेरे में वर्तमान में लगातार पानी चल रहा है। उनका कहना है कि चाल-खाल के निर्माण से प्राकृतिक जल स्रोतों को पुर्नजीवित कर गंगा के अस्तित्व को बचाया जा सकता है।मार्च माह में नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जल संरक्षण और संवर्द्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए नमामि गंगे और नीर फाउंडेशन की ओर से ‘रजत की बूंदें’ नेशनल वाटर अवॉर्ड 2021 से सच्चिदानंद भारती सम्मानित हो चुके है। वह इस वर्ष और हाल के कुछ वर्षों से भीषण वनाग्नि की घटनाओं से काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि जल और जंगलों को बचाने के लिए गंभीरता से काम करना होगा, तभी पर्यावरण बच सकेगा।

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भीषण वनाग्नि से पारिस्थितिकीय तंत्र गड़बड़ाने लगा है। इसे रोकने के लिए अल्पकालीन के साथ ही दीर्घकालीक योजना बनाने की जरूरत है। कहा कि वनाग्नि रोकने के लिए सूर्य के उत्तरायण होते ही मकर संक्रांति से धरातल पर काम शुरू हो जाना चाहिए। सबसे पहले वन क्षेत्र से सटे इलाकों और गांवों के लोगों को वनों की सुरक्षा के कार्य को कम से कम छह महीने मनरेगा योजना से जोड़ा जाना चाहिए। इसमें पहाड़ी क्षेत्रों में चीड़ के पत्तों को एकत्र करने से लेकर उसका प्रबंधन भी शामिल हो।


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