बुंदेलखंड प्रवेश द्वार व ऐतिहासिक नगरी कही जाने वाली में इंसानियत, ईमानदारी व खुद्दारी आज भी जिन्दा है आज भी इस नगरी को कालपी शरीफ या कालपी धाम के नाम से पुकारा जाता है जिसका जीता जगता सबूत रहीस भाई जो कि पुरानी फिल्मों के स्वयं डायलॉग बोलकर चलता फिरता रहीस टाकीज के नाम से स्वाभिमान के साथ थियेटर चलाकर दे दिया है। कोरोनाकाल में इन्होंने लोगों का मनोरंजन कर कोरोना जैसी महामारी का एहसास नहीं होने दिया। इनका सच्चाई और ईमानदारी भरा स्वभाव लोगों को अत्यधिक भाता है जिसकी बजह से लोग आते जाते इनकी आवाज को सुनना बहुत पसंद करते हैं। आपको बता दें कि रहीस भाई 25 साल से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं और कालपी के बच्चों का प्रेम देख 10 वर्ष से कालपी में लोगों का मनोरंजन कर रहें हैं। इनके चार बच्चे भी हैं जिनका भरण पोषण इसी व्यवसाय से करते हैं। कालपी के शासन प्रशासन व समाजसेवियों से ये गुजारिश है कि ऐसे ईमानदार व लगनशील व्यक्तियों की मदद होनी चहिये जिससे इनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके।









