हरिद्वार :आज एकादशी व्रत पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई हरकी पैड़ी पर डुबकी ।

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कामिका एकादशी के मौके पर आज बुधवार को हरिद्वार स्थित हरकी पैड़ी पर हजारों भक्त गंगा स्नान के लिए पहुंचे। हरकी पैड़ी सहित हरिद्वार के विभिन्न घाटों पर तड़के से ही स्नान का दौर शुरू हो गया था। एकादशी स्नान पर तीर्थनगरी में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। स्नान के दौरान हरकी पैड़ी पर कोविड नियमों की धज्जियां उड़ीं। बता दें कि कामिका एकादशी व्रत हर साल सावन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है। इस साल कामिका एकादशी व्रत 4 अगस्त, बुधवार यानी आज है। पद्म पुराण के अनुसार भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को एकादशी तिथि का महत्त्व समझाते हुए कहा है कि जैसे नागों में शेषनाग, पक्षियों में गरुड़, देवताओं में श्री विष्णु, वृक्षों में पीपल तथा मनुष्यों में ब्राह्मण श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण व्रतों में एकादशी श्रेष्ठ है। इस व्रत को करने के बाद और कोई पूजा करने की आवश्यकता नहीं होती। बता दें कि कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा आराधना की जाती है। मान्यताओं के अनुसार कामिका एकादशी के दिन शंख, चक्र गदा धारण करने वाले भगवान विष्णु की प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए।
एकादशी तिथि का प्रारंभ 03 अगस्त दिन मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से हुआ है। एकादशी तिथि का समापन 04 अगस्त दिन बुधवार को दोपहर 03 बजकर 17 मिनट पर होगा।
04 अगस्त को ही प्रात: काल 05:44 बजे से लेकर अगले दिन 05 अगस्त को प्रात: 04:25 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग है।
ऐसी मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है, भगवान विष्णु सभी कष्टों को दूर करते हैं। मनचाहा फल प्राप्त होता है। एकादशी के दिन गंगा स्नान, तीर्थस्थलों में स्नान और दान का भी किया जाता है। इस व्रत के फल को अश्वमेघ यज्ञ से मिलने वाले फल के बराबर माना गया है। इसकी कथा सुनने मात्र से ही यज्ञ करने के समान फल मिलता है। कामिका एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने से गंधर्वों और नागों की पूजा भी संपन्न होती है।

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