विचाराधीन बंदी की मौत के मामले में एसएसपी और सीओ को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई लेकिन बंदीरक्षकों को कोई राहत नहीं मिली। शुक्रवार को आईजी जेल ने हल्द्वानी उपकारागार के चार आरोपी बंदीरक्षकों का प्रदेश की अलग अलग जेलों में तबादला करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
आईजी जेल पुष्पक ज्योति ने इस मामले में तबादले का आदेश हल्द्वानी कारागार के अधीक्षक सतीश सुखीजा को भेजा है। इसके तहत प्रधान बंदीक्षक देवेंद्र सिंह को पौड़ी कारागार, देवेंद्र रावत को टिहरी जेल, हरीश कुमार को जिला कारागार अल्मोड़ा, कीर्ति बल्लभ को चमोली जेल भेजा जाएगा।
काशीपुर कुंडेश्वरी निवासी विचाराधीन बंदी की छह मार्च को हल्द्वानी उपकारागार में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया तो बंदी की पत्नी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत के आदेश के तहत कोतवाली पुलिस ने चारों बंदीरक्षकों के खिलाफ धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज किया। आरोप था कि उसके पति की मौत बंदीरक्षकों की पिटाई से हुई। इस मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एसएसपी प्रीति प्रियदर्शिनी और तत्कालीन सीओ को तबादला करने और विभागीय कार्रवाई करने के साथ मुकदमे की विवेचना सीबीआई से कराने के लिए शासन को आदेश दिए थे। प्रदेश सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट गई। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के तबादले और विभागीय कार्यवाही पर स्थगनादेश दिया लेकिन बंदीरक्षकों को किसी तरह की राहत नहीं मिल सकी।
सीबीआई कर रही मुकदमे की विवेचना
हाईकोर्ट के आदेश के तहत सीबीआई देहरादून की टीम विचाराधीन बंदी की मौत के मामले की जांच कर रही है। सीबीआई ने बंदीरक्षकों, गवाहों और बंदी के परिजनों के बयान ले चुकी है। इस मामले में सीबीआई डॉक्टरों और पुलिस के बयान दर्ज कर चुकी है लेकिन अभी तक विवेचना अंतिम निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है।







